जींद, JIND SANTRO DEVI STORY, 16 दिसंबर 2025- हरियाणा के नरवाना ब्लॉक के अलीपुर गांव में रहने वाली संतरो देवी (58) आज सुर्खियों में हैं। कारण? उनकी 20 साल की अथक मेहनत, जिसने दो साल के मासूम हरदीप को लेफ्टिनेंट हरदीप गिल बना दिया। सेना में अफसर बनने वाले हरदीप की कहानी जब मेजर जनरल यश मोर ने सोशल मीडिया पर साझा की, तो लाखों लोगों ने ‘जय हिंद’ के साथ मां को सलाम किया। संतरो देवी ने पति की मृत्यु के बाद न तो सरकारी आश्रय मांगा और न हार मानी; उन्होंने सरकारी स्कूल में मिड-डे मील वर्कर की नौकरी संभाली और खेतों में मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया-लिखाया।
पति गुजरे, संघर्ष शुरू हुआ
20 साल पहले संतरो के पति का देहांत हो गया। तीन बेटियां और दो साल का बेटा हरदीप था। गांव में दो एकड़ की छोटी जोत थी, लेकिन बिनि मर्द-मजदूर के खेती संभालना मुश्किल था। संतरो ने तय किया, “बच्चों को पढ़ाकर ही मैं सांस लूंगी।” वह सुबह 5 बजे उठकर खेतों में गेहूँ-बाजरी की रोपाई करतीं, दोपहर 12 बजे तक स्कूल पहुंचतीं, वहां मिड-डे मील बांटतीं और शाम को फिर खेत या मनरेगा में मजदूरी। पड़ोसिन रामवती देवी बताती हैं, “रात को वह चरखे पर तागा कातती, ताकि बच्चों की ड्रेस सिल सके।”
This is a story of grit and determination.
Story of Smt Santro Devi.
Her husband died 20 years ago, leaving behind three daughters and 2 year old Hardeep.
Worked as a ‘mid day meal’ worker in government school at paltry payment.
After school, worked in fields as a farm… pic.twitter.com/EJD2b21dAd
— Maj Gen (Dr) YashMor (@YashMor5) December 14, 2025
हरदीप ने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की, फिर नरवाना से 12वीं पास की। इग्नू से स्नातक किया और NDA की तैयारी शुरू की। मां ने कहा, “तू पढ़ाई कर, खेत की फिक्र मुझे है।” हरदीप ने दो साल खेतों में दिन में काम किया और रात में कोचिंग की। 2022 में वह नेशनल डिफेन्स अकादमी (NDA) में चयनित हुआ और इसी साल इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) से पास आउट होकर लेफ्टिनेंट बन गया। उनकी पहली पोस्टिंग कश्मीर में हुई है।
मेजर जनरल यश मोर ने साझा की स्टोरी
मेजर जनरल यश मोर, जो अभी डेपुटेशन पर जींद स्थित रीसेंट्री स्कूल में युवा अफसरों को मेंटर कर रहे हैं, ने हरदीप की कहानी को
अपने एक्स हैंडल पर लिखा:
“श्रीमती संतरो देवी की कहानी दृढ़ संकल्प और लगन की मिसाल है। 20 वर्ष पूर्व पति का देहांत, तीन बेटियां और 2 वर्षीय हरदीप—फिर भी हार नहीं मानी। मिड-डे मील वर्कर की मामूली तनख्वाह और खेतों की मजदूरी से उसने बच्चों को पढ़ाया। आज लेफ्टिनेंट हरदीप गिल आर्मी में ऑफिसर हैं। हमारे सशस्त्र बलों की असली ताकत ग्रामीण युवा हैं, वे ही कल के नेता बनेंगे। जय हिंद।”
पोस्ट 12 घंटे में 2.3 मिलियन व्यूज और 1.8 लाख लाइक्स पा चुकी है।
गांव में जश्न, मां में नम्रता
अलीपुर में 15 दिसंबर को गुरुद्वारा में शबद-कीर्तन का आयोजन किया गया। पंचायत ने संतरो देवी को ‘सम्मान पत्र’ दिया और ₹21,000 की राशि भेंट की। हरदीप ने कहा, “मेरी यूनिफॉर्म की पहली स्टार मां की मेहनत है। मैंने तो केवल दौड़ लगाई, मां ने रास्ता बनाया।” संतरो देवी की आंखें नम हो जाती हैं, “मेरे पति ने सपना देखा था—बेटा फौज में जाएगा। आज वह स्वर्ग से जरूर देख रहे होंगे।”
प्रशासनिक सराहना
जिला उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह (सेना से सेवानिवृत्त) ने संतरो देवी को ‘राष्ट्रीय मातृत्व पुरस्कार’ के लिए नामांकित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “ऐसी माताएं ग्रामीण भारत की असली हीरो हैं; उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करेगी।”
संतरो देवी का संदेश और प्रेरणा
- महिला सशक्तिकरण: संतरो देवी की जिंदगी बताती है कि शिक्षा और संघर्ष से कोई भी हालात बदल सकता है।
- सेना में ग्रामीण युवा: हरदीप जैसे कैडेट साबित करते हैं कि गांव के बच्चे भी सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकते हैं।
- सरकारी योजनाओं का असर: मिड-डे मील और इग्नू जैसी खुली विश्वविद्यालयी व्यवस्था ने दरवाजे खोले।
संतरो देवी की कहानी सिर्फ़ एक मां की ममता नहीं, बल्कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में छिपी असीम ऊर्जा का प्रतीक है। जब एक विधवा महिला खेतों में मजदूरी करके बेटे को NDA भेज सकती है, तो यह साबित होता है कि संकल्प से बड़ा कोई पाठशाला नहीं। मेजर जनरल यश मोर की पोस्ट ने इसे राष्ट्रीय मंच दिया है; अब यह जिम्मेदारी हम सबकी है कि ऐसी प्रेरणादायक कहानियों को आगे बढ़ाएं और ग्रामीण प्रतिभाओं को उड़ान देने के लिए संसाधन जुटाएं। जय हिंद, जय भारत!



