Haryana News: हरियाणा, जिसे भारतीय खाद्य सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है, वक्त के साथ हरियाणा प्रदेश भी अब एक नई पहचान बनाने की राह पर है. राज्य की नायब सैनी सरकार ने रक्षा विनिर्माण और एयरोस्पेस जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में एक बड़ा और महतवपूर्ण कदम उठाया है. व्यापार और विकास की नजर से देखा जाए तो यह केवल एक औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि हरियाणा राज्य के आर्थिक भविष्य को नई बुलंदियों पर ले जाने का एक सुनियोजित दूरगामी निति के तहत खाका तैयार किया है.
हरियाणा भी अब बनेगा इंजीनियरों का भी हब
इस फैसले से दिखाई देता है कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है – जिसके मुताबिक आने वाले देश में हरियाणा को एयरोस्पेस और डिफेंस manufacturing में एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना. इस विजन को साकार करने के लिए वर्तमान में दो प्रमुख परियोजनाओं पर बड़ी तेजी से काम चल रहा है.
पहला है राज्य के करनाल जिलें में एक अत्याधुनिक क्रू ट्रेनिंग सेंटर (सीटीटीसी) की स्थापना करना. मिली जानकारी के मुताबिक यह केंद्र केवल पायलटों को प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह विमानन से जुड़े इंजीनियरों और ground staff के लिए एक व्यापक कौशल विकास केंद्र भी बनेगा. जिस का सीधा मतलब है कि अब हरियाणा के युवा अपने राज्य में ही world-class aviation training आसानी से प्राप्त कर सकेंगे.
हरियाणा के हिसार जिले में बन रहा 3000 एकड़ का ‘इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर’
सरकार की दूसरी योजना व सबसे महत्वाकांक्षी पहलू हिसार जिलें में विकसित किया जाने वाला इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) है. राज्य सरकार द्वारा इसे भारत के सबसे बड़े एयरोस्पेस और डिफेंस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना पर हरियाणा एयरोस्पेस एंड डिफेंस कॉर्पोरेशन (HADC) और राष्ट्रीय औद्योगिक corridor ट्रस्ट मिलकर काम कर रहे हैं, जो एक मजबूत PPP मॉडल को दर्शाता है. करीबन 4,680 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण में 980 एकड़ जमीन सीधे तौर पर विनिर्माण इकाइयों के लिए उपलब्ध होगी. इन इकाइयों में aircraft parts, ड्रोन, डिफेंस equipment, और software जैसे तकनीकी उत्पाद बनाए जायेंगे .
युवाओं के लिए 25,000 नौकरियों का सर्जन
इस पूरी initiative का सबसे रोमांचक पहलू है राज्य में रोजगार का सृजन. सरकार को अनुमान है कि इससे लगभग 25,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा. ये नौकरियां सिर्फ उच्च-स्तरीय इंजीनियरों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक staff, और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी होंगी. साथ ही, राज्य में उत्कृष्टता केंद्र और शोध संस्थान स्थापित होंगे, जिससे हरियाणा का युवा तकनीक के दौर में research और innovation की दुनिया से सीधे जुड़ सकेगा.
निवेशकों के लिए हरियाणा बना आकर्षण का केंद्र
नायब सैनी के कमान वाली राज्य सरकार की नई एयरोस्पेस और डिफेंस नीति का मुख्य लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) का निवेश राज्य के मुंद्रा भंडार के लिए आकर्षित करना है. इस परियोजना के लिए जरूरत की पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया पहले ही लगभग पूरी हो चुकी है, जो निवेशकों के लिए सुरक्षा और स्थिरता का साफ़ संकेत देती है. जानकारों मुताबिक यह कदम हरियाणा को ‘ease of doing business’ के मामले में भारत के टॉप राज्यों की लाइन में पहुँचा देगा.
विकास की निति के अनुसार हरियाणा सरकार की यह पहल केवल एक औद्योगिक घोषणा नहीं है, बल्कि हरियाणा राज्य के नए युग की एक सामाजिक-आर्थिक क्रांति की शुरुआत है. यह राज्य के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगी और प्रदेश की छवि को एक कृषि-प्रधान राज्य से एक उन्नत technology hub में बदलने का काम करेगी. भविष्य में यह वाकई में हरियाणा के भविष्य के लिए एक game changer साबित हो सकता है.



