Haryana News in hindi,चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य में बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में ई-वेस्ट संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां पुराने और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को वैज्ञानिक विधि से नष्ट किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
ई-वेस्ट के लिए जिला स्तरीय केंद्र
हरियाणा सरकार ने यह निर्णय प्रदेश में बढ़ते ई-वेस्ट के प्रभाव को देखते हुए लिया है। वर्तमान में हरियाणा में 42 अधिकृत ई-वेस्ट रीसाइक्लर कार्यरत हैं, जो पुराने कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी, फ्रिज और वाशिंग मशीन जैसे उपकरणों को पुनः उपयोग योग्य बनाने या सुरक्षित रूप से नष्ट करने का काम कर रहे हैं। अब इन प्रयासों को और अधिक व्यापक बनाने के लिए प्रत्येक जिले में संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे आम नागरिकों को अपने पुराने उपकरणों के निपटान के लिए एक सुलभ और सुरक्षित विकल्प मिलेगा।
हरियाणा में ठोस कचरे की चुनौती और समाधान
पर्यावरण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 5600 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से केवल 77 प्रतिशत कचरे का ही उचित निपटान हो पाता है, जबकि शेष 23 प्रतिशत खुले में पड़ा रह जाता है, जो वायु और भूमि प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने 13 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट्स स्थापित करने का निर्णय भी लिया है। इन संयंत्रों के माध्यम से ठोस कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।
वायु गुणवत्ता पर पड़ता है प्रभाव
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) वर्षा ऋतु के लगभग 70 दिनों को छोड़कर सामान्यतः 200 से 500 के बीच बना रहता है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होगा। सरकार का उद्देश्य है कि इन प्रयासों से प्रदेश की वायु गुणवत्ता में सुधार हो और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
हरियाणा में जैव-चिकित्सा और औद्योगिक कचरे का प्रबंधन
राज्य सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि हरियाणा के लगभग 7000 अस्पतालों से प्रतिदिन निकलने वाले 22 टन जैव-चिकित्सा कचरे का 100 प्रतिशत निपटान किया जा रहा है। इसके लिए 11 सामान्य जैव-चिकित्सा अपशिष्ट निपटान केंद्र स्थापित किए गए हैं। वहीं, औद्योगिक इकाइयों से उत्पन्न खतरनाक कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए फरीदाबाद के पाली क्षेत्र में एक विशेष प्रबंधन स्थल विकसित किया गया है। यह केंद्र औद्योगिक अपशिष्ट को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप निष्पादित करने में सहायक होगा।
वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए नई पहल
वायु प्रदूषण की निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए राज्यभर में 18 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन लगाए जा रहे हैं। इन स्टेशनों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों के माध्यम से हरियाणा पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम राज्य में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। ई-वेस्ट, ठोस कचरा, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट और औद्योगिक कचरे के प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों से न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण संभव होगा, बल्कि नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित जीवन जीने का अवसर भी मिलेगा। आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल कायम कर सकता है।



