haryana news today in hindi- हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे विकास कार्यों में हो रही लापरवाही और खानापूर्ति का एक चौंकाने वाला मामला सोनीपत जिले के गांव थरिया में जिम निर्माण में सामने आया है। यहां युवाओं को फिट रखने के लिए बनाए जा रहे ओपन जिम को गांव के कब्रिस्तान में कब्रों के ऊपर ही लगा दिया गया है। इस मुर्खता भरे कार्य ने न केवल ग्रामीणों में गुस्सा पैदा किया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप भी मचा दिया है। मामला तब और भी गंभीर हो गया जब पता चला कि ग्रामीणों द्वारा स्कूल परिसर में जिम लगाने के सुझाव को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
ग्रामीणों के सुझाव की अनदेखी, कब्रिस्तान में लगा जिम
गांव थरिया में ब्लॉक समिति की ओर से ओपन जिम आवंटित हुआ था। लगभग दो माह पूर्व सरपंच फरमान से जिम के लिए उपयुक्त स्थान चुनने का अनुरोध किया गया। अधिकांश ग्रामीणों ने इसे गांव के बीचोंबीच स्थित सरकारी स्कूल के परिसर में लगाने का सुझाव दिया, क्योंकि यह स्थान युवाओं के लिए सुगम और उपयुक्त भी होता।
परंतु सरपंच ने गांव में पंचायती जमीन न होने का तर्क देते हुए गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित कब्रिस्तान के भीतर जिम लगवाने का निर्णय लिया। जिस जमीन पर जिम की मशीनें गाड़ी गईं, वहां वर्षों पूर्व शवों का दफन किया जाता था। ठेकेदार के कर्मचारियों ने मात्र मिट्टी खोदकर मशीनें स्थापित कर दीं, वहां कंक्रीट का फर्श तक भी नहीं बनाया गया।
युवाओं का बहिष्कार, उठ रहे गंभीर सवाल
इस अव्यवहारिक निर्णय का परिणाम यह हुआ कि आज कोई भी युवा उस कब्रिस्तान में जाकर व्यायाम करने को तैयार नहीं है। ग्रामीण इरशाद के अनुसार, गांव में लगभग 400 युवा ऐसे हैं जिन्हें वास्तव में जिम की आवश्यकता भी है, लेकिन इस तरह की लापरवाही ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह जिम किसके लिए बनवाया गया है? क्या कब्रों से निकलकर मुर्दे व्यायाम करेंगे? मामला सार्वजनिक होने के बाद अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं और जनता की मजाक बन रही है।
कमीशनखोरी के आरोप, अधिकारी बचने में लगे
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि ओपन जिम जैसे विकास कार्यों में कमीशनखोरी का खेल व्यापक स्तर पर चल रहा है। ठेकेदार से लेकर विभिन्न स्तर के अधिकारियों तक में कमीशन की बंदरबांट की जाती है, जिसके कारण ऐसी अनियमितताएं बढ़ रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी मामला सामने आने पर अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ब्लॉक समिति के चेयरमैन नवीन से जब इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया और केवल इतना कहा कि वे सरपंच से पूछकर बताएंगे।
गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
गांव थरिया की लगभग 2800 की आबादी है, जिसमें करीब 1400 मतदाता हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में आठवीं कक्षा तक का एक सरकारी स्कूल और तीन मस्जिदें हैं, लेकिन कोई डिस्पेंसरी या अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में, विकास के नाम पर कब्रिस्तान में ओपन जिम लगाने का निर्णय ग्रामीणों के लिए एक मजाक बनकर रह गया है। सरपंच फरमान का दावा है कि पंचायत के पास जमीन न होने के कारण यह निर्णय लिया गया, लेकिन ग्रामीण इस तर्क को सिरे से खारिज करते हैं।
गांव थरिया का यह जिम मामला ग्रामीण विकास योजनाओं में हो रही लापरवाही, योजनाबद्धता के अभाव और संभावित भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण बन गया है। यह घटना एक चेतावनी है कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। प्रशासन का कर्तव्य है कि वह इस मामले की गहन जांच करे और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लग सके। ग्रामीणों की जरूरतों को समझते हुए ही वास्तविक विकास संभव है।



