Haryana News, फरीदाबाद। हरियाणा पर्यटन निगम की ओर से सूरजकुंड में आयोजित होने वाला वार्षिक दीवाली मेला इस बार आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। मेला, जो इस साल आगामी 2 से 7 अक्टूबर तक लगेगा, की एंट्री टिकट की कीमत में सरकार ने तीन गुने से अधिक की बढ़ोतरी कर दी है। बीते साल मात्र 30 रुपये में मिलने वाली टिकट इस बार 100 रुपये की होगी। इस भारी इजाफे ने मेले में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
क्यों बढ़ाई गई टिकट की कीमत?
हरियाणा पर्यटन निगम के एक अधिकारी हरविंदर यादव के मुताबिक, इस बार टिकट दर बढ़ाने की मुख्य वजह सरकार से बजट का न मिलना है। उन्होंने बताया कि 2023 में सरकारी फंडिंग की वजह से टिकट की दर कम रखी गई थी। लेकिन इस बार मेले को अपने खर्चे स्वयं वहन करने होंगे, इसलिए एंट्री शुल्क बढ़ाया गया है ताकि मेले के आयोजन की लागत पूरी की जा सके।
पिछले साल क्यों रहा सूरजकुंड मेला फीका?
गौरतलब है कि पिछले साल 2023 में भी यह सूरजकुंड मेला आयोजित किया गया था, लेकिन टिकट दर कम होने के बावजूद लोगों का उत्साह देखने को नहीं मिला था। मेले में भीड़ कम रहने के कारण इसे विशेष सफलता नहीं मिल पाई थी। ऐसे में, इस बार टिकट कीमत बढ़ाए जाने पर यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि क्या लोग महंगी टिकट खरीदकर भी मेले में आएंगे?
क्या है सूरजकुंड मेले में खास?
इस बार सूरजकुंड मेले में लगभग 500 वाणिज्यिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ दीवाली की सजावट का सामान, खिलौने, बर्तन, आभूषण आदि की खरीदारी की जा सकेगी। इसके अलावा, मेले में स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल और शाम के समय आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। स्टॉल और एंट्री टिकट की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। इच्छुक लोग हरियाणा पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट ‘haryanatourism.gov.in’ पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं।
जेब पर पड़ेगा असर?
टिकट दर में हुई इस वृद्धि का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जो पूरे परिवार के साथ मेले का आनंद लेना चाहते हैं। एक परिवार के लिए केवल एंट्री टिकट पर ही कई सौ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं, जिसके बाद मेले के अंदर होने वाले खर्चे अलग होंगे। इससे मेले में आने वाले लोगों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, सूरजकुंड दीवाली मेले में टिकट कीमत बढ़ाने का फैसला आम जनता और पर्यटकों के लिए एक चुनौती बन गया है। एक ओर जहाँ मेले को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह डर भी है कि कहीं यह कदम मेले की रौनक को कम न कर दे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 100 रुपये की टिकट के बावजूद लोग मेले में उमड़ेंगे या फिर यह मेला पिछले साल की तरह ही फीका रहेगा।



