Paddy procurement start in Haryana: हरियाणा के लाखों धान किसानों के चेहरे पर इन दिनों राहत की मुस्कान है। हरियाणा प्रदेश सरकार ने किसानो की उनकी परेशानियों और चिंताओं को समझते हुए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। जहाँ पहले हर साल एक अक्टूबर से राज्य की मंडियों में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी धान की खरीद शुरू होती थी, वहीं इस बार यह प्रक्रिया एक सप्ताह पहले, यानी 22 सितंबर से शुरू हो गई है। इस कदम को बारिश के प्रभाव से दुखी किसानों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि इस निर्णय के पीछे इस साल हुई लगातार बारिश और उससे फसल को हुए नुकसान जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं। बारिश के कारण न सिर्फ खेतों में कटाई का काम प्रभावित हुआ है, बल्कि गीले खेतों में पराली सड़ने और बाद में उसे जलाने के खतरे भी बढ़ गए हैं। इन्हीं हालातों से निपटने और किसानों को त्वरित सहायता प्रदान करने के मकसद से सरकार ने खरीद की तारीख पिछले साल आगे बढ़ाने का फैसला किया।
धान खरीद पर किसान-हितैषी फैसला
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के बाद यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने खुद कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें लगातार MSP बढ़ाने का काम कर रही हैं, न कि इसे खत्म करने का जैसा कि विपक्ष दावा करता है। इस संदर्भ में उन्होंने आँकड़े भी पेश किए। वर्ष 2014 में सामान्य धान का MSP 1360 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 2369 रुपये हो गया है। इसी तरह, ग्रेड-ए धान का मूल्य 1400 रुपये से बढ़ाकर 2389 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।
धान की पराली प्रबंधन पर जोर और सब्सिडी
धान की खरीद के साथ-साथ सरकार की नजर इस साल पराली प्रबंधन पर भी है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी भी दी जा रही है। उन्होंने हरियाणा के किसानों को जागरूक बताते हुए उम्मीद जताई कि इस बार किसान पराली नहीं जलाएंगे और पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करेंगे। खरीद जल्दी शुरू होने से किसानों के पास पराली निपटाने के लिए अधिक समय भी मिलेगा, जिससे पर्यावरण को फायदा होगा।
हरियाणा की धान मंडियाँ हैं पूरी तरह तैयार
सरकार ने यह भी दावा किया है कि प्रदेश की सभी मंडियों में धान की खरीद के लिए हर जरूरी तैयारी पूरी कर ली गई है। किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ख्याल रखा गया है। सरकार का मकसद है कि किसान बिना किसी देरी और झंझट के अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।
प्राकृतिक खेती और नई किस्मों पर जोर
हरियाणा कृषि मंत्री ने अपने बयान में एक और महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर ले जाना चाहती है। उनका तर्क था कि रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी खतरे, खासतौर पर कैंसर जैसी बीमारियाँ बढ़ी हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से न सिर्फ लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों जैसे जलभराव और सूखे से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों से सूखा-प्रतिरोधी फसल किस्में विकसित करने का आग्रह किया गया है। इससे किसानों को प्रतिकूल मौसम में भी नुकसान से बचाया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, धान की खरीद शुरू होने की तारीख बढ़ाने का यह फैसला हरियाणा के किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम साबित होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। यह कदम न सिर्फ उनकी आर्थिक मदद करेगा, बल्कि पराली जलाने और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने में भी एक बड़ी अहम भूमिका निभाएगा।




