Fastag schem News- केंद्र की मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई फास्टैग वार्षिक पास (FASTag Annual Pass) स्कीम, जो यात्रियों के लिए सुविधा और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बनाई गई थी, अब वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। इस स्कीम में मौजूद तकनीकी खामियों के कारण देशभर के हजारों वाहन चालकों के हजारों रुपये फंस गए हैं और उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है।
फास्टैग वार्षिक पास (FASTag Annual Pass) में क्या है मुख्य समस्या?
फास्टैग वार्षिक पास (FASTag Annual Pass) में मुख्य समस्या तब शुरू होती है जब किसी वाहन का शीशा टूट जाता है या वाहन मालिक अपनी गाड़ी बेच देता है। और उसका फास्टैग शीशे पर चिपका होता है, और शीशा टूटने पर नया फास्टैग जारी करवाना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि पुराने फास्टैग में रिचार्ज किए गए वार्षिक पास के पैसे नए फास्टैग में ट्रांसफर नहीं हो पाते। इस प्रक्रिया के लिए आधिकारिक पोर्टल पर कोई विकल्प ही मौजूद नहीं है।
गाड़ी बेचने पर भी नहीं मिलता फास्टैग वार्षिक पास (FASTag Annual Pass) रिफंड
यह समस्या सिर्फ शीशा टूटने तक सीमित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपना वाहन बेच देता है और फास्टैग खाता बंद करवाता है, तब भी वार्षिक पास में जमा शेष राशि का रिफंड उसे नहीं मिल पाता। बैंक और फास्टैग जारी करने वाली कंपनियां इस स्थिति में कोई स्पष्ट समाधान प्रदान नहीं कर पा रही हैं, जिससे लोगों का पैसा अब डूब रहा है।
‘डुप्लीकेट FASTag’ भी नहीं है कोई समाधान
वाहन मालिकों के पास एक विकल्प ‘डुप्लीकेट फास्टैग’ जारी करवाने का भी होता है। लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लगती है। नया फास्टैग जारी तो हो जाता है, लेकिन पुराने फास्टैग में जमा वार्षिक पास का बैलेंस नए में ट्रांसफर नहीं होता। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को दोबारा से पैसा रिचार्ज डाल कर रिचार्ज करना पड़ता है।
वाहन मालिकों में गुस्सा, “सीधे जेब पर चोट”
इस स्थिति से परेशान वाहन मालिकों का कहना है कि यह योजना लाभ के बजाय उनको नुकसान पहुंचा रही है। उनका सवाल है कि जब वार्षिक पास का पैसा पहले ही जमा कर दिया गया है, तो उसे नए फास्टैग में ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा सकता? कई लोग इसे “सीधे जेब पर चोट” बता रहे हैं। देशभर में अनुमानित तौर पर करोड़ों रुपये वाहन मालिकों के फंसे हुए हैं, और ऑनलाइन व ऑफलाइन शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल रहा है।
FASTag से पैसे निकालने के लिए क्या है समाधान का रास्ता?
वाहन मालिकों और यातायात विशेषज्ञों की मांग है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्र सरकार को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। आधिकारिक पोर्टल पर ऐसा विकल्प जोड़ा जाना चाहिए जहां:
1. डुप्लीकेट फास्टैग जारी होने पर बैलेंस ट्रांसफर भी किया जा सके।
2. वाहन बेचे जाने या फास्टैग स्थायी रूप से बंद होने पर शेष राशि का रिफंड प्राप्त किया जा सके।
अगर सरकार की नज़र में देखा जाये तो फास्टैग प्रणाली देश में यातायात को सुगम बनाने के लिए एक अच्छी पहल थी, लेकिन वार्षिक पास से जुड़ी यह तकनीकी कमी इसके उद्देश्य को खोखला कर रही है। सरकार को चाहिए कि वह तुरंत इस समस्या की ओर ध्यान दे और वाहन मालिकों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रक्रिया लागू करे। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक वार्षिक पास योजना वाहन मालिकों के लिए एक जोखिम भरा निवेश बनी रहेगी।




