INLD News in Hindi, रोहतक। हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर से इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की हलचल तेज हो गई है। पार्टी के नेता अभय सिंह चौटाला 25 सितंबर को रोहतक में एक बड़ी ‘सम्मान रैली’ के जरिए न सिर्फ अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहे हैं, बल्कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। यह रैली कई मायनों में खास है – यह पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के निधन के बाद अभय चौटाला की अगुवाई वाली पहली बड़ी जनसभा है, और इसे पार्टी की ‘वापसी’ तथा अभय के ‘जाटों के मजबूत नेता’ के तौर पर उभरने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
हर जिले में जाकर बांटा निमंत्रण
INLD के अभय चौटाला इस रैली को सफल बनाने के लिए जोर-शोर से जुटे हुए थे। वह पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और आम जनता से सीधा जुड़ाव बनाने के लिए प्रदेश के हर जिले का दौरा कर चुके हैं। लगातार हार से टूट चुके कार्यकर्ताओं को पार्टी के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाकर उनमें नई ऊर्जा भरने की कोशिश की जा रही है।
INLD की हुड्डा को ‘बी टीम’ बताने की रणनीति
अभय चौटाला की रणनीति साफ दिख रही है। वह सीधे तौर पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को निशाना बना रहे हैं और उन्हें भाजपा की ‘बी टीम’ करार दे रहे हैं। इसके पीछे का उद्देश्य स्पष्ट है – भाजपा से नाराज मतदाताओं, खासकर जाट समुदाय को यह संदेश देना कि कांग्रेस भाजपा के खिलाफ कोई वास्तविक विकल्प नहीं है, क्योंकि हुड्डा उनसे “मिले हुए” हैं। अभय दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में सत्ताधारी दल का एकमात्र असली विकल्प INLD ही है।
INLD क्यों चुना गया रोहतक को?
रोहतक का चुनाव कोई संयोग नहीं है। यह इलाका कभी पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का गढ़ हुआ करता था, लेकिन बाद में यह चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव में चला गया। अभय चौटाला की नजर अब इसी ‘जाटलैंड’ पर टिकी हुई है। माना जाता है कि अगर रोहतक में इनेलो की जड़ें मजबूत होती हैं, तो पूरे राज्य में पार्टी के लिए रास्ता आसान हो सकता है। रैली से पहले हुड्डा से जुड़े कई लोगों को पार्टी में शामिल करना भी इसी रणनीति का अहम हिस्सा है।
INLD कर रही 2029 की तैयारी, लेकिन चुनौतियां भी बड़ी
अभय चौटाला 2029 के चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। हालांकि, राह आसान नहीं है। INLD पार्टी 2005 के बाद से लगातार गिरावट का शिकार रही है। 2019 में परिवार के टूटने और अजय सिंह चौटाला के अलग पार्टी (JJP) बनाने से इनेलो को गहरा झटका लगा। अभय के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में दूसरे प्रभावशाली नेताओं का अभाव है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के मजबूत संगठनात्मक ढांचे के सामने टिक पाना मुश्किल होगा।
रैली होगी INLD की अग्निपरीक्षा
25 सितंबर की रोहतक रैली अभय सिंह चौटाला और इनेलो के लिए एक अग्निपरीक्षा साबित होगी। रैली में उमड़ी भीड़ यह तय करेगी कि क्या अभय वाकई हरियाणा की राजनीति में इनेलो की पुरानी धाक फिर से कायम कर पाने में सफल होते हैं। यह रैली न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल के लिए, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक समीकरणों को तय करने के लिए भी अहम साबित होगी। हरियाणा की जनता और राजनीतिक हलकों की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या चौटाला परिवार एक बार फिर से राज्य की राजनीति के केंद्र में लौट पाएगा।



