Pakistan News- पाकिस्तानी वायुसेना का एक सैन्य अभियान एक भीषण त्रासदी में बदल गया है, जब उसके J-17 लड़ाकू विमानों से गिराए गए बमों ने आतंकियों के बजाय अपने ही पकिस्तान नागरिकों को निशाना बना लिया। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की तिराह वैली में सोमवार तड़के हुए इस हमले में कम से कम 30 निर्दोष नागरिकों की मौत की सूचना मिल रही है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं, और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी है।
घटना उस समय की है जब पाकिस्तानी वायुसेना खैबर पख्तूनख्वा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TPP) के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर रही थी। इसी क्रम में, सेना ने डेरा इस्माइल में सात आतंकियों को ढेर करने का भी दावा भी किया। हालांकि, तिराह वैली में निशाना चूक गया और बम नागरिक बस्तियों पर जा कर गिरे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बमबारी इतनी तीव्र थी कि लोगों के बचने का कोई मौका नहीं रहा।
पाकिस्तानी वायुसेना हमले की बारीकियाँ और सेना का खंडन
स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान वायुसेना ने चीन निर्मित जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए कम से कम आठ एलएस-6 प्रिसिजन ग्लाइड बम गिराए। यह दावा किया जा रहा है कि हमले के वक्त गांव में किसी आतंकवादी की मौजूदगी की पुष्टि नहीं थी।
हालाँकि, पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने हवाई हमले से इनकार किया है। सेना का कहना है कि यह घटना एक “आतंकी बारूद विस्फोट” का नतीजा थी, जिसमें 12-14 आतंकियों के साथ 8-10 नागरिकों की मौत हुई। सेना ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर आरोप लगाया कि उन्होंने नागरिक इलाकों में मस्जिदों और घरों के पास विस्फोटक छिपा रखे थे।
पख्तूनख्वा की राजनीतिक और सैन्य पृष्ठभूमि
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का एक अशांत सीमावर्ती इलाका है, जहां इस साल अगस्त तक 700 से अधिक आतंकी हमले हो भी चुके हैं, जिनमें 258 सुरक्षा बलों के जवान मारे गए हैं। यह इलाका पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का राजनितिक गढ़ भी माना जाता है, जिनके सेना के साथ तनावपूर्ण संबंध सार्वजनिक हैं। हाल में ही सेना पर इस क्षेत्र में लोगों को प्रताड़ित करने के आरोप लगे थे। इस पृष्ठभूमि में, इस घटना को एक ‘भूल’ मानने पर भी सवाल उठना भी स्वाभाविक है।
वायुसेना द्वारा यह TPP, जिसके खिलाफ यह ऑपरेशन चलाया जा रहा था, संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 6000 से अधिक लड़ाकों वाला एक शक्तिशाली आतंकी संगठन है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में बैठा तालिबान शासन TPPको शरण और समर्थन दे रहा है।
पाकिस्तानी वायुसेना की इस घटना ने न केवल पाकिस्तानी सेना की क्षमता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि देश के भीतर मानवाधिकारों और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस भीषण मानवीय क्षति की जिम्मेदारी लेता है या नहीं।




