La Nina weather,नई दिल्ली: मानसून की विदाई के साथ ही अब सर्दियों का इंतजार देश में शुरू हो गया है, और इस बार का शीत ऋतु 2025 अपने साथ एक चुनौती लेकर आ सकता है। भारत के मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि ला नीना (La Nina)नाम की जलवायु परिघटना के कारण इस साल उत्तर भारत राज्यों में सामान्य से अधिक ठंड पड़ सकती है। जानकारी के लिए बता दे कि ला नीना (La Nina)प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक घटना है जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है।
क्या है ला नीना(La Nina)?
ला नीना एक स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ है ‘छोटी बच्ची’। बता दे कि यह अल नीनो की विपरीत परिघटना है। जहां अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ाता है, वहीं ला नीना इसके विपरीत कम करने का काम करता है। इसका सीधा असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ता है, और भारत जैसे देशों में इसके कारण सर्दियों में अधिक ठंड पड़ सकती है।
ला नीना(La Nina) पर विशेषज्ञों की चेतावनी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि ला नीना के इस साल वापस आने की 71% तक संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में देखने को भी मिल सकता है। इन क्षेत्रों में नवंबर और दिसंबर महीनों में सामान्य से अधिक पाला पड़ सकता है और शीत लहरों की संभावना बढ़ सकती है।
क्या होगा असर?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, ला नीना के प्रभाव से:
– उत्तर भारत में तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस नीचे तक जा सकता है
– दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड भी पड़ सकती है
– शीत लहरों की अवधि बढ़ सकती है
– पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ज्यादा हो सकती है
ला नीना(La Nina) के लिए तैयारी की जरूरत
इस संभावित सर्दी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को पहले से तैयारी करने की सलाह दे रहे हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और गरीब तबके के लोगों के लिए यह सर्दी चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। सरकारी एजेंसियों को भी ठंड से निपटने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
हालांकि मौसम विभाग अभी अंतिम पूर्वानुमान जारी करना बाकी है, लेकिन ला नीना की संभावना को देखते हुए इस सर्दी के लिए पहले से तैयारी करना समझदारी होगी। प्रकृति के इस बदलाव के सामने मानवता एक बार फिर अपनी तैयारियों की परीक्षा देने को तैयार है।




