Onion Prices News, कृषि डेस्क : देश के किसान आज प्याज की रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों को प्याज मात्र 1-2 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने को विवश होना पड़ रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमतों में 8-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह विरोधाभासी स्थिति किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा रही है, जो अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं।
प्याज किसानों पर दोहरा दबाव
हाल के सप्ताहों में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन लागत भी वसूल न हो पाने की रही है। मध्य प्रदेश में किसान प्याज 1-2 रुपये प्रति किलो पर बेच रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में यह कीमत 1-1.5 रुपये प्रति किलो तक सिमट गई है। इसके विपरीत, देशभर के खुदरा बाजारों में प्याज के दाम पिछले एक महीने में 8-10 प्रतिशत बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण सितंबर-अक्टूबर में महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में खराब मौसम के कारण फसल को पहुँचा नुकसान है, जिसने बाजार में आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया है।
प्याज पर निर्यात प्रतिबंधों ने बढ़ाई मुसीबत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो बांग्लादेश में प्याज की कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई है, लेकिन भारत सरकार द्वारा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध और 25 प्रतिशत की export duty ने किसानों को वैश्विक बाजार से वंचित कर दिया है। हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास सिंह के अनुसार, “2023-24 में निर्यात प्रतिबंध के कारण हमारा सबसे बड़ा खरीदार बांग्लादेश आत्मनिर्भर हो गया है। इससे पहले हमने अनुमान लगाया था कि इस साल कीमतें नहीं बढ़ेंगी, क्योंकि उत्पादन का आंकड़ा पहले से ही उच्च स्तर पर था।”
उत्पादन और भंडारण की चुनौतियाँ
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के recent data के अनुसार, इस साल प्याज का उत्पादन 307 लाख मैट्रिक टन रिकॉर्ड किया गया है, जबकि निजी एजेंसियों का अनुमान 317 लाख मैट्रिक टन का है। इस अतिरिक्त उत्पादन ने बाजार में असंतुलन पैदा कर दिया है। साथ ही, भारी बारिश के कारण भंडारित प्याज का 30-40 प्रतिशत हिस्सा खराब हो गया, जिससे किसानों की समस्याएँ और बढ़ गईं। NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद बड़े स्टॉक ने भी बाजार में कीमतों पर दबाव बनाए रखा है, जहाँ मेट्रो शहरों में प्याज 10-12 रुपये प्रति किलो पर बिक रहा है।
आपूर्ति में वृद्धि और मांग का अभाव
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से प्याज की आपूर्ति में हुई वृद्धि ने इस संकट को और गहरा दिया है। किसानों ने रबी सीजन की प्याज को भंडारित कर रखा था, ताकि भविष्य में कीमतों में उछाल आने पर लाभ कमा सकें, लेकिन उनकी यह योजना बाजार की स्थितियों के कारण विफल रही। श्री सिंह के अनुसार, “न केवल भारत, बल्कि अन्य प्याज उत्पादक देशों में भी इस साल उत्पादन अधिक हुआ है, जिसका सीधा प्रभाव वैश्विक कीमतों पर पड़ रहा है।”
भविष्य की संभावनाएँ और समाधान
आने वाले समय में प्याज की कीमतों में सुधार की उम्मीद तब तक कम है, जब तक सरकार निर्यात नीति में बदलाव नहीं करती या किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं करती। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को बेहतर भंडारण सुविधाओं और मांग-आधारित फसल योजना पर ध्यान देना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, जिसमें निर्यात प्रतिबंधों में ढील और भंडारण का विकास शामिल है। अगर समय रहते उचित उपाय नहीं किए गए, तो किसानों का यह संकट और गहरा सकता है, जो देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।



