Haryana Halchal व्यापार डेस्क: शुक्रवार, 28 नवंबर को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में वृद्धि और डॉलर में आई मजबूती के बीच रुपया शुरुआती कारोबार में 7 पैसे की गिरावट के साथ 89.43 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुँच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा धन निकासी के चलते भी घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।
आर्थिक आँकड़ों की प्रतीक्षा में निवेशक
विदेशी मुद्रा व्यापारी इस समय सतर्कता बरतते हुए आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि वह जुलाई-सितंबर तिमाही की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर के आँकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके दिन में ही जारी होने की संभावना है। ये आँकड़े अर्थव्यवस्था की दिशा और रुपये की भविष्य की राह को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हीं अनिश्चितताओं के बीच बाजार की गतिविधियाँ सिमटी हुई दिखाई दीं।
कारोबार का विवरण
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 89.41 के स्तर पर खुला। शुरुआती लेन-देन में ही इसमें गिरावट आई और यह 89.43 के स्तर पर पहुँच गया, जो कि गुरुवार के अपने पिछले बंद स्तर से 7 पैसे की कमजोरी को दर्शाता है। गुरुवार, 27 नवंबर को रुपया 14 पैसे टूटकर 89.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस प्रकार, रुपये में लगातार दूसरे दिन कमजोरी का रुख देखने को मिल रहा है।
डॉलर सूचकांक में वृद्धि
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की स्थिति मजबूत बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स, जो अमेरिकी डॉलर की मुद्रा की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ताकत को मापता है, में 0.04 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 99.56 के स्तर पर पहुँच गया। डॉलर की इस मजबूती का एक प्रमुख कारण महीने के अंत में आयातकों और बैंकों द्वारा व्यापार भुगतान निपटान के लिए बढ़ती हुई डॉलर मांग को बताया जा रहा है।
कच्चे तेल के मूल्यों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिली, जिसका सीधा दबाव भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुद्रा पर पड़ता है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के दामों में 0.41 प्रतिशत का उछाल आया और यह 63.60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गया। उच्च तेल की कीमतें देश के व्यापार घाटे को चौड़ा कर सकती हैं, जो रुपये के लिए एक नकारात्मक संकेत है।
घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख
इस बीच, घरेलू इक्विटी बाजारों में शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 91.01 अंकों की बढ़त के साथ 85,811.39 के स्तर पर पहुँच गया। इसी प्रकार, एनएसई का निफ्टी 18.85 अंकों की वृद्धि के साथ 26,234.55 पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजारों का यह सकारात्मक प्रदर्शन रुपये को पूर्ण समर्थन देने में असमर्थ रहा।
भविष्य की संभावनाएँ
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। जीडीपी के आँकड़े, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों की राह रुपये के लिए निर्णायक साबित होंगे। अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है या तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो रुपया अगले सत्रों में और दबाव का सामना कर सकता है। निवेशकों और आयातकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए रखें।



