HARYANA HALCHAL – राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। इस लड़ाई में अब प्रशासन ने वाहनों के उत्सर्जन को निशाना बनाते हुए कड़े कदम उठाए हैं। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत, अधिकारियों ने महज 17 दिनों की अवधि में प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वाले 20,000 से अधिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह आंकड़ा उस सख्ती का सबूत है, जो दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए अपनाई जा रही है।
प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर जुर्माने की मार
इस अभियान की केंद्रीय कड़ी ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट’ यानी PUCC है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन वाहनों के पास यह वैध प्रमाणपत्र नहीं पाया गया, उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री सत्यवीर कटारा ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, “GRAP-2 को 19 अक्टूबर से लागू किया गया है और इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई जारी है। अब तक PUCC के अभाव में 20,000 से अधिक चालान काटे जा चुके हैं।”
बीएस-3 से पुराने और बाहरी वाहनों पर रोक
कार्रवाई का दायरा केवल प्रदूषण प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं है। राजधानी में प्रवेश करने वाले ऐसे वाणिज्यिक वाहन, जो बीएस-3 मानदंडों से भी पुराने हैं और दिल्ली में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें वापस लौटा दिया जा रहा है। श्री कटारा ने स्पष्ट किया, “हमारा फोकस उन वाहनों पर है जो अत्यधिक प्रदूषण फैलाते हैं। बीएस-3 से नीचे के पेट्रोल-डीजल वाहन और गैर-दिल्ली पंजीकृत वाणिज्यिक वाहनों को प्रवेश से रोका जा रहा है।” उन्होंने दिल्लीवासियों से इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
CAQM का प्रतिबंध: एक कदम और आगे
इन कार्रवाइयों को और मजबूती देते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने भी एक अहम फैसला लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि 1 नवंबर से दिल्ली में सभी गैर-दिल्ली पंजीकृत बीएस-3 और उससे नीचे के वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होगा। आयोग के एक बयान के अनुसार, यह कदम वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब प्रदूषण का स्तर चरम पर होता है। हालाँकि, एक राहत की बात यह है कि बीएस-4 मानक वाले वाणिज्यिक वाहनों को 31 अक्टूबर, 2026 तक का संक्रमणकालीन समय दिया गया है।
किन वाहनों को मिलेगी छूट?
इस पूरे प्रतिबंध के बीच स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों के लिए रास्ता खुला हुआ है। CAQM के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दिल्ली में पंजीकृत वाणिज्यिक वाहनों के साथ-साथ CNG, LNG और इलेक्ट्रिक वाहनों पर कोई पाबंदी नहीं है। इसी प्रकार, बीएस-6 मानकों का पालन करने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों को पूरे साल बिना किसी रोक-टोक के चलने की अनुमति रहेगी। यह नीति स्वच्छ परिवहन विकल्पों को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाती है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चल रहा यह अभियान एक स्पष्ट संदेश दे रहा है कि अब प्रदूषण फैलाने वालों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। 20,000 चालान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी हैं। भविष्य में और भी सख्त नियम लागू होने की संभावना है। ऐसे में, यह जनता और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी बनती है कि वे दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए स्वच्छ तकनीकों और सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। आने वाली सर्दी दिल्ली के लिए एक परीक्षा लेकर आएगी, और यह अभियान उसकी तैयारी का एक अहम हिस्सा है।



