Haryana Crime News, सिरसा- पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता का एक कड़ा संदेश देते हुए, पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने जिला पुलिस मालखाने के रिकॉर्ड में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के मद्देनजर कठोर कार्रवाई का परिचय दिया है। इस मामले में, मालखाने के पूर्व प्रभारी रहे एसआई कुलदीप के खिलाफ संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि एसआई कुलदीप का 31 अक्टूबर, 2025 को रिटायर होना इस मामले का एक अहम पहलू है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ASI कुलदीप के रिटायर होने के बाद मालखाने की बागडोर सब-इंस्पेक्टर महेंद्र को सौंपी गई। नए प्रभारी द्वारा पद संभालने से पहले मालखाने में रखे सामान का ब्यौरा तैयार करने और रिकॉर्ड का सत्यापन करने पर हैरान कर देने वाली बातें सामने आईं। रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि मालखाने में रखे गए मादक पदार्थों, जिनमें हेरोइन, अफीम, चूरा-पोस्त, गांजा और अन्य प्रतिबंधित दवाइयाँ शामिल हैं, के रिकॉर्ड और वास्तविक मात्रा में भारी अंतर पाया गया। यह कमी इस मामले को और भी गंभीर बना देती है, क्योंकि अतीत में भी पुलिस विभाग पर मादक पदार्थों की गैर-कानूनी बिक्री में संलिप्त होने के आरोप लगते रहे हैं।
एक पुरानी इमारत और जमा है बरसों का सामान
जानकारी मुताबिक यह पुलिस मालखाना, जो लघु सचिवालय के समीप स्थित है, अपनी स्थापना के 35 वर्ष बाद भी विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई बना हुआ है। यहाँ पर पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में जब्त किए गए मादक पदार्थ, अवैध शराब, प्रतिबंधित दवाइयाँ, हथियार, कारतूस और वाहन रखे जाते हैं। बताया जाता है कि लंबे समय तक यह सारा सामान खुले में ही पड़ा रहता था, हालाँकि लगभग छह माह पूर्व इस परिसर के चारों ओर सुरक्षा हेतु कंटीले तारों की दीवार खिंचवाई गई थी। मालखाने में कई वर्षों पुराना जब्त सामान भी मौजूद है, जिसके रख-रखाव और हिसाब-किताब में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।
आरोपी अधिकारी का रहा है बेदाग रिकॉर्ड
आरोपी ASI कुलदीप, जो सिरसा के बाटा कॉलोनी निवासी हैं, का विभागीय रिकॉर्ड अब तक काफी हद तक साफ रहा है। मालखाने का प्रभारी बनाए जाने से पहले वह सिरसा सदर, शहर थाना, चौपटा, डबवाली समेत कई थानों और सिरसा कोर्ट में नायब कोर्ट के रूप में भी तैनात रह चुके हैं। विभाग के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संभवतः उन्होंने मालखाने का प्रभार संभालते समय पुराने सामान का सही ढंग से मिलान नहीं किया होगा। हालाँकि, यह भी माना जा रहा है कि यह कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कार्य हो सकता है। पूर्णतः विस्तृत जांच के बाद ही इस पहेली से पर्दा उठ पाएगा।
प्रशासन का रुख साफ और सख्त
इस संवेदनशील मामले पर पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण का रुख बेहद स्पष्ट और सख्त है। उन्होंने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। एसपी सहारण के अनुसार, “मालखाने के रिकॉर्ड की जांच में जो अनियमितताएं सामने आई हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं। इसी के मद्देनजर पूर्व मालखाना प्रभारी ASI कुलदीप के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। हमने सभी संबंधित कर्मचारियों को भविष्य में ऐसी कोई लापरवाही न होने देने और रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।”
सिरसा पुलिस का यह कदम न केवल एक आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि यह पुलिस विभाग के भीतर ही व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति की ओर भी एक स्पष्ट इशारा है। यह मामला आंतरिक निगरानी और पारदर्शिता की उस जरूरत को फिर से रेखांकित करता है, जिससे जनता का विभाग पर घटता विश्वास फिर से मजबूत हो सके। भविष्य में होने वाली जांच ही तय करेगी कि यह मामला कितने गहरे जाल में फंसा है और क्या इससे विभाग में सचमुच सुधार की एक नई लहर शुरू हो पाती है।



