Haryana Crime News– यमुनानगर के प्रताप नगर बस स्टैंड पर गुरुवार सुबह एक भीषण सड़क दुर्घटना में छह कॉलेज छात्राएं रोडवेज बस की चपेट में आ गईं। यह हादसा पांवटा साहिब से यमुनानगर आ रही बस के प्रताप नगर बस स्टैंड पहुंचने पर घटित हुआ। घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव का माहौल है, जहां आक्रोशित छात्रों ने बस अड्डे पर हंगामा शुरू कर दिया है। ३ घायल छात्राओं की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें तत्काल यमुनानगर रेफर किया गया है।
हादसे की विभीषिका: जीवन से खेल गया खेल
गुरुवार की सुबह जब पांवटा साहिब से यमुनानगर की ओर चली रोडवेज बस प्रताप नगर बस स्टैंड पहुंची, तो कॉलेज जाने की जल्दबाजी में छात्र-छात्राओं का समूह बस में सवार होने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान बस के पिछले टायरों की चपेट में आकर छह छात्राएं सीधे तौर पर प्रभावित हुईं। पहचान के आधार पर घायलों में प्रताप नगर की अर्चिता, अंजलि और अमनदीप, कुटीपुर गांव की आरती, टिब्बी की मुस्कान तथा बहादुरपुर निवासी संजना शामिल हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा सभी घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रताप नगर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के पश्चात उन्हें यमुनानगर के बेहतर चिकित्सालयों में रेफर कर दिया गया।
हादसे के बाद छात्रों का आक्रोश और प्रशासन की कार्रवाई
इस सड़क दुर्घटना ने पूरे बस अड्डे के माहौल को विस्फोटक बना दिया। घटना की खबर सुनते ही आक्रोशित कॉलेज छात्रों ने बस स्टैंड पर हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों के गुस्से का असर यह हुआ कि अन्य स्टेशनों से आने वाली सभी बसों को यमुनानगर जाने से रोक दिया गया। मौके पर मौजूद प्रताप नगर के एसएचओ नर सिंह और डायल 112 के सब इंस्पेक्टर कंवरपाल सहित अन्य पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को शांत करने और समझाने-बुझाने का प्रयास किया। इस संवेदनशील स्थिति में प्रशासन की ओर से संयम बरता जा रहा है।
जांच के दायरे में बस चालक और कंडक्टर
सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद रोडवेज बस के ड्राइवर अनिल और कंडक्टर कमल को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। चालक अनिल के अनुसार, “जैसे ही मैं पांवटा साहिब से बस लेकर प्रताप नगर बस स्टैंड पहुंचा, बस में सवार होने की जल्दबाजी में छात्र बस की चपेट में आ गए।” थाना प्रभारी नरसिंह ने बताया कि दोनों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और पूरी घटना की गहन जांच की जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह हादसा महज लापरवाही का नतीजा था या फिर बस स्टैंड पर व्यवस्था में कमी इसका कारण बनी।
सवाल जो इस सड़क हादसे के बाद जहन में उठें
यमुनानगर का यह दुखद सड़क हादसा न सिर्फ छह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का मामला है, बल्कि यह सार्वजनिक सड़क परिवहन व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी लगाता है। क्या बस स्टैंडों पर यात्री सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या बस चालकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए जाते हैं? ये सवाल अब पूरे प्रशासन के सामने मुंह बाए खड़े हैं।
जहां एक ओर घायल छात्राओं के स्वास्थ्य की चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर छात्रों का आक्रोश भविष्य में और बड़े विरोध का रूप ले सकता है। सड़क सुरक्षा और यात्री कल्याण के मामले में अभी बहुत कुछ सुधार की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में प्रशासन किस हद तक दोषियों को कठोर दंड दिलवा पाता है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है, यह देखना समय की मांग होगी।



