Haryana Crime News, गोहाना: गोहाना शहर में सैकड़ों लोगों की जमा-पूंजी ठगी डुबोकर एक निजी बैंक के संचालक फरार हो गए हैं। ‘पीएनएल मोर धन बैंक’ नामक इस संस्था ने लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने के आकर्षक प्रलोभन देकर करोड़ों रुपये की ठगी की है। पीड़ित निवेशकों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और मंगलवार को पहले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने न केवल निवेशकों को आर्थिक रूप से तबाह किया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर वित्तीय संस्थाओं के प्रति विश्वास को भी गहरा झटका पहुंचाया है।
निवेशकों के सपनों पर पानी फेरने वाली साजिश
दरअसल यह पूरा मामला सुनियोजित ठगी का एक बड़ा नेटवर्क प्रतीत होता है। 25 अक्टूबर को सिकंदपुर माजरा निवासी प्रवीन सहित कई लोगों ने गोहाना शहर थाने में एक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्होंने ‘पीएनएल मोर धन बैंक’ में अपनी कड़ी मेहनत की कमाई जमा करवाई थी। बैंक ने उन्हें एफडी (सावधि जमा) और सेविंग अकाउंट (बचत खाता) खोलने के लिए प्रोत्साहित किया और अविश्वसनीय रिटर्न का वादा किया। लगभग 40 से 45 करोड़ रुपये की विशाल राशि लोगों ने इस बैंक में जमा करवाई, यह सोचकर कि उनका भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
जब खुले ठगी का सचजब निवेशकों की एफडी और आरडी (आवर्ती जमा) की अवधि पूरी हुई। जब लोग अपना पैसा निकालने बैंक पहुंचे, तो वहां का नज़ारा बदल चुका था। ठगी के बाद बैंक के मालिक और कर्मचारी लापता हो चुके थे। कुछ निवेशकों ने बताया कि उन्हें बैंक से बाहर निकालते हुए साफ कह दिया गया कि उन्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा।
कुछ समय बाद बैंक के कर्मचारियों ने आधिकारिक तौर पर बताया कि बैंक बंद हो गया है और उसका सारा ऑनलाइन पोर्टल भी बंद कर दिया गया है। इसके बाद तो एक और सनसनीखेज मोड़ आया, जब कर्मचारियों ने निवेशकों से उनके सभी मूल दस्तावेज वापस मांगे। इस कदम ने निवेशकों के मन में यह शक पैदा कर दिया कि बैंक का पूरा स्टाफ मिलीभगत में है और उनकी योजना किसी भी तरह का रिफंड देने की नहीं है।
धमकियों और डर का माहौल
इस पूरे ठगी प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि जब पीड़ितों ने रिफंड के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो उन्हें सीधे तौर पर धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। आरोपियों ने निवेशकों से कहा कि अगर उन्होंने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई की कोशिश की, तो उन्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा। उन्हें 2-3 साल इंतजार करने को कहा गया, जो स्पष्ट रूप से समय हासिल करने की एक रणनीति थी। शिकायतकर्ताओं को बाद में पता चला कि बैंक के मालिकान, जिनमें पवन, राजेश, राकेश और कौशल जैसे नाम सामने आए हैं, बैंक को दिवालिया घोषित करवाकर विदेश भागने की तैयारी में थे।
पुलिस की कार्रवाई और पहली गिरफ्तारी
निवेशकों की मुश्किलों को देखते हुए पुलिस ने इस ठगी के मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। लगातार जांच जारी रही और आखिरकार मंगलवार को पुलिस को पहली बड़ी सफलता मिली। लक्ष्मी नगर, गोहाना निवासी पवन नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस दौरान पुलिस उससे पूछताछ करके घटना की जटिल जाल को सुलझाने और अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
गोहाना का यह बैंक घोटाला न केवल एक बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी है, बल्कि आम जनता के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। यह घटना उन जोखिमों की याद दिलाती है, जो बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के ऊंचे रिटर्न के वादे पर विश्वास करने से जुड़े हैं। पुलिस की यह गिरफ्तारी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अभी लंबी कानूनी लड़ाई बाकी है।
सवाल यह है कि क्या पुलिस शीघ्र ही ठगी के अन्य आरोपियों को पकड़ पाएगी और क्या निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल पाएगा? इसका जवाब भविष्य के गर्भ में छुपा है, लेकिन इतना तो तय है कि इस घटना ने गोहाना के लोगों की नींद उड़ा दी है और वित्तीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।



