Haryana News, करनाल. हरियाणा के करनाल जिले में सरकारी धान के स्टॉक में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कई राइस मिलों और अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. यह कार्रवाई तब हुई जब जिला अधिकारियों की टीम ने फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान धान के स्टॉक में भारी अनियमितताएं पाईं.
धान के फर्जी गेट पास से खुला राज
धान घोटाले का मामला तब उजागर हुआ जब करनाल अनाज मंडी में फर्जी गेट पास काटे जाने की शिकायत सामने आई. इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जांच शुरू की. जांच में पता चला कि तरावड़ी अनाज मंडी से बीआरसी राइस मिल को 24,334 क्विंटल, मित्तल राइस मिल को 53,538 क्विंटल और शिनाय राइस मिल को 54,511 क्विंटल धान आवंटित किया गया था. इसके अलावा बीआरसी राइस मिल को जिले की अन्य मंडियों से भी लगभग 25 हजार क्विंटल धान दिया गया था.
जब अधिकारियों की टीम ने इन मिलों का भौतिक सत्यापन किया तो स्टॉक में भारी गड़बड़ी पाई गई. इसके बाद तत्काल प्रभाव से तीनों मिलों के स्टॉक पर तुरंत प्रभाव से तालाबंदी कर दी गई.
धान खरीद में गड़बड़ी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई
जांच के आधार पर तरावड़ी मार्केट कमेटी के सचिव संजीव सचदेवा और खाद्य आपूर्ति विभाग के उपनिरीक्षक रामफल के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धान के स्टॉक में मिली गड़बड़ी गंभीर है और इसमें मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
एक अन्य मामला भी उजागर
इसी बीच, जिला उपायुक्त उत्तम सिंह ने जानकारी दी कि एक अलग मामले में भी धान की मात्रा में कमी पाई गई. इस मामले में एक राइस मिलर और चार मंडियों के निरीक्षकों की संलिप्तता सामने आई है. जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक अनिल कुमार की शिकायत पर थाना सदर करनाल में FIR दर्ज की गई है.
आरोपियों में मैसर्ज बटान फूड्स सलारू करनाल के संचालक सतीश कुमार, अनाज मंडी घरौंडा के निरीक्षक यशवीर सिंह, अनाज मंडी जुंडला के निरीक्षक संदीप शर्मा, अनाज मंडी करनाल के निरीक्षक समीर वशिष्ठ और अनाज मंडी निसिंग के निरीक्षक लोकेश शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में संबंधित ट्रांसपोर्टर और आढ़तियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है.
धान खरीद पर प्रशासन की सख्ती
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी धान के स्टॉक में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि मंडियों और मिलों में नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
किसानों की चिंता
इस पूरे मामले ने किसानों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद में गड़बड़ी होने से उनकी मेहनत पर असर पड़ता है. यदि धान का सही तरीके से उठान और भंडारण नहीं होगा तो इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा.
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में मंडियों और राइस मिलों की निगरानी और कड़ी की जाएगी. साथ ही, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है ताकि धान की खरीद से लेकर मिलों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो सके.
करनाल में सामने आया यह धान घोटाला सरकारी खरीद प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. राइस मिल संचालकों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी स्टॉक में गड़बड़ी होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि किसानों के हितों को भी प्रभावित करता है. अब देखना होगा कि प्रशासन की सख्ती और जांच के बाद यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और दोषियों को किस हद तक जवाबदेह ठहराया जाता है.



