Haryana news in hindi-हरियाणा बिजली चोरी राज्य के दो बिजली वितरण निगमों के बीच एक दिलचस्प और चिंताजनक खाई देखने को मिल रही है। और यह खाई बिजली चोरी के मामलों में है। बिजली वितरण निगमों द्वारा ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में बिजली चोरी का सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के इलाके हैं, जबकि उत्तर हरियाणा निगम (UHBVN) के जिले इस मामले में काफी पीछे हैं।
हाल ही में जारी जून 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो DHBVN के 12 जिलों में कुल 8,750 घरों में बिजली चोरी पकड़ी गई। यह आंकड़ा पूरे वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 6,2700 के आंकड़े को छू गया है। पिछले साल (2023-24) तो स्थिति और भी गंभीर थी, जब कुल 51,208 घरों में बिजली चोरी करते पकड़ा गया।
DHBVN बनाम UHBVN क्यों है इतना फर्क?
प्रदेश के बिजली निगम DHBVN के अंतर्गत हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी जैसे कृषि प्रधान इलाके तो आते ही हैं, साथ ही देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहर भी इसी में शामिल हैं। इसके विपरीत, UHBVN के अंतर्गत आने वाले पंचकूला, अम्बाला, करनाल, पानीपत और रोहतक जैसे 10 जिलों में चोरी के मामले काफी कम मिली हैं। यहां इस साल अब तक सिर्फ 3,648 मामले ही दर्ज किए गए हैं। यह फर्क साफ इशारा करता है कि प्रवर्तन और जागरूकता में कहीं न कहीं बड़ा अंतर है।
बिजली चोरी FIR का सिलसिला जारी कम हुए मामले?
हालांकि, एक उम्मीद की किरण भी है। चोरी के मामलों में दर्ज होने वाली FIR की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट देखी गई है। इस साल (जनवरी-जुलाई) में 32,059 FIR दर्ज हुईं। यह संख्या चुनावी साल 2024 में 39,401 और 2023 में 63,643 थी। 2022 में तो यह आंकड़ा 82,087 तक पहुंच गया था। इस गिरावट के पीछे सख्त कार्रवाई और डिजिटल मीटरिंग जैसे कदमों को एक मुख्य वजह माना जा सकता है।
निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनें राज्य के 21.57 लाख डिफॉल्टर
आंकड़ों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रदेश में चोरी या बिल न चुकाने वाले उपभोक्ताओं की कुल संख्या 21.57 लाख तक है। इनमें से 10.72 लाख ग्रामीण और 4.85 लाख शहरी उपभोक्ता शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन डिफॉल्टरों में 2.97 लाख कृषि कनेक्शन और 48 हजार औद्योगिक कनेक्शन भी शामिल हैं। यहां तक कि लगभग 23,920 सरकारी विभाग भी बकाया राशि जमा नहीं करा रहे हैं।
यह आंकड़ा सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं दिखाता, बल्कि बिजली वितरण प्रणाली की सेहत पर भी एक बड़ा सवाल गहरा खड़ा करता है। निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती न सिर्फ चोरी रोकना है, बल्कि हरियाणा की इस विशाल डिफॉल्टर आबादी को नियमित करने की भी है, तभी बिजली क्षेत्र में सुधार उम्मीद की जा सकती है।



