चंडीगढ़: हरियाणा डेयरी विकास सहकारी संघ ने अपने लोकप्रिय ब्रांड ‘वीटा घी’ की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 20 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है, क्योंकि यह बढ़ोतरी सितंबर महीने में जीएसटी में कटौती के बाद की गई पहली महत्वपूर्ण कीमत समायोजन है। संघ के प्रबंध निदेशक ने पुष्टि की कि यह वृद्धि घी के सभी प्रकारों और पैकिंग विकल्पों पर लागू होगी, जिसमें एमपीसीएस को होने वाली बिक्री भी शामिल है।
वीटा घी की कीमतों में उतार-चढ़ाव: जीएसटी लाभ रहा थोड़े दिन
सितंबर माह में जब केंद्र सरकार ने डेयरी उत्पादों पर जीएसटी दरों में कटौती की थी, तब उपभोक्ताओं को वीटा घी की कीमतों में कुछ राहत महसूस हुई थी। हालांकि, यह राहत अल्पकालिक साबित हुई है। नवीनतम बढ़ोतरी के बाद एक लीटर वीटा घी का पैक 610 रुपये से बढ़कर 630 रुपये हो गया है। सबसे अधिक प्रभाव थोक खरीदारों पर सीधा पड़ा है, जहां 15 लीटर के टिन की कीमत में 290 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही घी की कीमतें लगभग उसी स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां जीएसटी में कटौती से पहले थीं।
हरियाणा डेयरी फेडरेशन का पक्ष: उत्पादन लागत में वृद्धि है मुख्य कारण
हरियाणा डेयरी विकास सहकारी संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कीमत समायोजन अनिवार्य था। उन्होंने कहा, “दूध की खरीद कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि, प्रसंस्करण लागत में इजाफा और परिवहन व्यय के बढ़ने के कारण हमें यह कदम उठाना पड़ा है। हाल के महीनों में डेयरी उत्पादों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा प्रभाव हमारे उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है।” अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बढ़ोतरी राज्य भर के सभी वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए समान रूप से लागू होगी।
वीटा घी के उपभोक्ताओं पर प्रभाव: घरेलू बजट पर पड़ेगा असर
इस कीमत वृद्धि का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ेगा। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि वीटा घी की इस कीमत वृद्धि का बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। डेयरी उद्योग विश्लेषक डॉ. राजीव कुमार ने बताया, “वीटा ब्रांड हरियाणा और आसपास के राज्यों में डेयरी उत्पादों के बाजार में एक अग्रणी भूमिका निभाता है। जब कोई प्रमुख ब्रांड अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाता है, तो अन्य कंपनियां भी इसी रास्ते पर चलती हैं। हमें आने वाले दिनों में अन्य डेयरी ब्रांड्स द्वारा भी अपने उत्पादों की कीमतों में समायोजन की उम्मीद करनी चाहिए।”
यह कीमत वृद्धि न केवल उपभोक्ताओं के लिए, बल्कि पूरी डेयरी उद्योग श्रृंखला के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार की शक्तियां किस दिशा में कार्य करती हैं और सरकार इसमें स्थिरता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।



