Haryana : हरियाणा (Haryana) के किसानों को बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं से होने वाले नुकसान के मद्देनजर एक बड़ी राहत मिली है। Haryana में राज्य सरकार ने हाई-टेंशन बिजली लाइनों और उनके टावरों से प्रभावित किसानों के लिए एक नई एवं उदार मुआवजा नीति लागू कर दी है। ऊर्जा विभाग द्वारा 30 जनवरी, 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब 66 केवी या इससे अधिक क्षमता की बिजली लाइनों के टावर के लिए किसानों को जमीन के लिए कलेक्टर दर का 200 प्रतिशत तक मुआवजा मिलेगा।
Haryana में जमीन के मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी
Haryana नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब मुआवजे की गणना केवल टावर के आधार क्षेत्रफल तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें टावर के बेस एरिया के साथ-साथ उसके चारों ओर एक-एक मीटर का अतिरिक्त क्षेत्र भी शामिल किया गया है। इससे मुआवजे की रकम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो किसानों को सीधा और पर्याप्त आर्थिक फायदा पहुंचाएगी। इससे पहले केवल टावर के आधार क्षेत्र का ही मुआवजा दिया जाता था।
Haryana में फसल क्षति का मुआवजा होगा आसान
नई नीति में फसल नुकसान के मुआवजे की प्रक्रिया को भी सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब प्रभावित क्षेत्र के पटवारी या राजस्व अधिकारी के प्रमाण पत्र के आधार पर फसल क्षति का आकलन किया जाएगा। इस प्रमाणपत्र में किसान का नाम, प्रभावित भूमि का क्षेत्र, फसल का प्रकार, अनुमानित उपज एवं उसका बाजार मूल्य स्पष्ट रूप से दर्ज होगा। स्वीकृत मुआवजे की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की देरी या अनियमितता की संभावना कम होगी।
Haryana में अब नोटिफिकेशन एवं लागू होने वाली एजेंसियां
इस नीति के तहत “66 केवी और उससे अधिक इन्ट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन लाइनों के लिए फसल नुकसान मुआवजा नीति” शीर्षक वाली इस अधिसूचना को 30 जनवरी, 2026 को जारी किया गया है। यह नीति राज्य में लागू होने वाली सभी नई ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं पर लागू होगी। इसमें हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) सहित सभी सरकारी एवं निजी एजेंसियां शामिल होंगी।
Haryana में होगा बदलाव
यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा किसान हितों को प्राथमिकता देने और बुनियादी ढांचा विकास एवं कृषि क्षेत्र के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बिजली परियोजनाओं के कारण होने वाली जमीन एवं फसल क्षति के लिए मिलने वाला मुआवजा और अधिक न्यायसंगत एवं पर्याप्त होगा। इसके साथ ही, सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उनके अधिकारों की प्राप्ति में सुविधा होगी।
राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों के हितों को प्राथमिकता देने और बुनियादी ढांचा विकास व कृषि क्षेत्र के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जमीन और फसल क्षति के लिए न्यायसंगत मुआवजा मिलने से किसानों को राहत मिलेगी। साथ ही, सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उनके अधिकार समय पर प्राप्त होंगे।



