Arijit Singh Net Worth, नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के सबसे लोकप्रिय और भावनात्मक आवाज़ों में से एक अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। 27 जनवरी को उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि अब वह फिल्मों के लिए गाना नहीं गाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आगे वह संगीत की दुनिया में किसी अन्य रूप में जुड़े रहेंगे या नहीं।
मुंबई नहीं, गांव है Arijit Singh का ठिकाना
अरिजीत सिंह की सादगी उनके चाहने वालों को हमेशा प्रभावित करती है। जहां फिल्म और संगीत जगत से जुड़े अधिकांश कलाकार मुंबई में रहना पसंद करते हैं, वहीं अरिजीत केवल काम के सिलसिले में मुंबई जाते हैं और फिर अपने गांव लौट आते हैं। वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज गांव में रहते हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें वह गांव की गलियों में आम लोगों की तरह घूमते नजर आते हैं।
साल 2025 में रिलीज हुए उनके गाने ‘Sapphire’ में भी उन्होंने अपने गांव को दिखाया था। इस गाने में इंटरनेशनल सिंगर एड शीरन भी उनके साथ गांव की गलियों में नजर आए थे।
Arijit Singh बच्चों को पढ़ाते हैं लोकल स्कूल में
अरिजीत की सादगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को किसी बड़े इंटरनेशनल स्कूल में नहीं, बल्कि गांव के ही एक साधारण स्कूल में दाखिला दिलाया है। उनके करीबी दोस्त इंद्रदीप दास गुप्ता ने बताया कि अरिजीत कभी भी ग्लैमर और चकाचौंध से प्रभावित नहीं हुए। काम के अलावा वह ज्यादातर समय गांव में ही बिताते हैं और अपने बच्चों को भी जमीन से जुड़े रहने की शिक्षा देते हैं।
Arijit Singh नेटवर्थ और जीवनशैली
सियासत.कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अरिजीत सिंह की कुल संपत्ति लगभग 414 करोड़ रुपये है। उन्होंने अपने घर में ही एक स्टूडियो बना रखा है, जहां वह संगीत से जुड़े काम करते हैं। अरिजीत का मानना है कि मुंबई ने उन्हें शोहरत और कामयाबी दी है, लेकिन उनका दिल हमेशा जियागंज में ही बसता है।
वह अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया से दूर रखकर बाहर खेलने, घूमने और नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। यही वजह है कि इतनी बड़ी सफलता और संपत्ति के बावजूद अरिजीत आज भी बेहद साधारण और सादगी भरी जिंदगी जीते हैं।
Arijit Singh का प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट उनके प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाली खबर है। लेकिन उनकी सादगी और गांव से जुड़ाव यह साबित करता है कि असली सफलता वही है, जो इंसान को अपनी जड़ों से जोड़े रखे।



