रोहतक, 27 नवंबर- खेल के मैदान में उम्मीदों की दौड़ लगाने आए एक किशोर खिलाड़ी की जान का दाम चुकाना पड़ गया। मंगलवार की भोर लाखनमाजरा गाँव की बास्केटबॉल नर्सरी में वह दौड़ लगा रहा था जब 750 किलोग्राम वज़नी लोहे का पोल अचानक गिर पड़ा। 16 वर्षीय खिलाड़ी हार्दिक, जो दसवीं कक्षा का छात्र और राज्य स्तरीय खिलाड़ी बनने की राह पर था, अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ चुका था। घटना की गूँज मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँची तो खेल विभाग ने तत्काल प्रभाव से जिला खेल अधिकारी अनूप सिंह को निलंबित कर दिया और पूरी नर्सरी को सील कर दिया।
घटना-स्थल पर मौजूद खिलाड़ियों का कहना है कि सुबह करीब साढ़े छह बजे सभी खिलाड़ी वार्म-अप कर रहे थे। हार्दिक ने दौड़ते हुए पोल को पकड़ा ही था कि जंग खाये बोल्ट टूट गए और पूरा ढाँचा उसकी छाती पर आ गिरा। चीख-पुकार मच गई; कुछ सेकेंड तक तो कोई समझ ही नहीं पाया कि क्या हुआ। फिर चार-पाँच खिलाड़ियों ने मिलकर पोल हटाया और साइकिल पर अस्पताल दौड़े, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्यवाही
मृतक खिलाड़ी के पिता की शिकायत पर सिविल लाइन थाने में धारा 304-A (लापरवाही से मौत) दर्ज कर ली गई है। उपायुक्त डॉ. पंकज चौधरी ने बताया कि मामले की मजिस्ट्रियल जाँच आगामी 15 दिन में पूरी की जाएगी। “हमने तत्काल जिला खेल अधिकारी को निलंबित करते हुए पूरे जिले की खेल सुविधाओं का सघन निरीक्षण करने का आदेश दिया है। जहाँ भी उपकरण जर्जर मिलेंगे, वहाँ तुरंत प्रतिस्थापन होगा,” उन्होंने कहा।
खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने शोक व्यक्त करते हुए 28 नवंबर को पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। सभी जिला खेल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर उपकरणों की सुरक्षा जाँच का दस्तावेज़ी प्रमाण साथ लाएँ। बैठक में तय होगा कि किस प्रकार एक समयबद्ध रोड-मैप तैयार कर पूरे प्रदेश की खेल नर्सरियों को सुरक्षित बनाया जाए।
विशेष समिति गठित
उपकरणों की स्थिति, रख-रखाव और सुरक्षा मानकों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें राजीव गांधी स्टेडियम के इंचार्ज वीरेंद्र दलाल, बास्केटबॉल कोच सतपाल देशवाल और लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता राजीव शर्मा शामिल हैं। समिति को सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है; रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि कौन-से पोल, रिंग या नेट की मियाद समाप्त हो चुकी है और कहाँ तत्काल मरम्मत की दरकार है।
उपकरणों की स्थिति, रख-रखाव और सुरक्षा मानकों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें राजीव गांधी स्टेडियम के इंचार्ज वीरेंद्र दलाल, बास्केटबॉल कोच सतपाल देशवाल और लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता राजीव शर्मा शामिल हैं। समिति को सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है; रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि कौन-से पोल, रिंग या नेट की मियाद समाप्त हो चुकी है और कहाँ तत्काल मरम्मत की दरकार है।
खिलाड़ी के परिवार की माँग : दोषियों पर कड़ी कार्यवाही
खिलाड़ी हार्दिक के पिता सतबीर ने बताया कि खिलाड़ी बेटा प्रतिदिन पाँच किलोमीटर दौड़ता था और राज्य टीम में चयन की तैयारी कर रहा था। “हमने कई बार नर्सरी प्रभारी से कहा कि पोल हिल रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब मेरी माँग है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो ताकि कोई दूसरा हार्दिक इस तरह की मौत न मरे,” उन्होंने कहा। गाँव की पंचायत ने भी प्रस्ताव पारित कर मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि और एक सरकारी नौकरी की माँग की है।
समय रहते यदि सभी नर्सरियों की जर्जर संरचनाओं को बदल दिया जाए तो शायद खिलाड़ी हार्दिक की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी और खेल के मैदान फिर कभी किसी माँ का आँचल नहीं छीनेंगे। घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खेल को बढ़ावा देने की होड़ में बुनियादी सुरक्षा को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। अब जब सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, तो आवश्यकता इस बात की है कि जाँच रिपोर्ट सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे।



