जालंधर ग्रामीण, 27 नवंबर 2025 – चौकी किशनगढ़ के अंतर्गत आते एक गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शांत गलियां शुक्रवार को अचानक सिहर उठीं, जब 10वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा ने डीपी मास्टर पर गंभीर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। आरोप है कि ‘ब्यूटी लैब’ के पास स्थित कमरे में अध्यापक राजिंदर कुमार ने उसे पीछे से पकड़कर जबरन अश्लील हरकत की। छात्रा की हिम्मत और शोर मचाने की जुगत ने उसे शिक्षक की चंगुल से छुड़ाया, लेकिन घटना ने पूरे पंचायत क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘मैंने सोचा कोई काम होगा, पर…’
पीड़ित छात्रा के पुलिस-बयान के अनुसार, वह दोपहर करीब 12 बजे अपनी कक्षा-अध्यापिका से मिलने जा रही थी। रास्ते में डीपी मास्टर राजिंदर कुमार (52) मिला और कहा, “लैब में एक फाइल रखनी है, तू आ जरा।” लड़की ने बताया, “मैंने सोचा कोई स्कूल-काम होगा, पर अंदर जाते ही उसने दराज़ बंद करने का बहाना बनाया और पीछे से कसकर पकड़ लिया। जब मैं चिल्लाई तो उसने मुंह दबाने की कोशिश की।” किसी तरह वहां रखी कुर्सी से हाथ मारकर वह बाहर भागी और प्रिंसिपल सुमन शर्मा के कक्ष में जा घुसी। प्रिंसिपल ने तुरंत टीचर जसविंदर कौर व अरशीपाल सिंह को बुलाकर आरोपी का पक्ष सुना। मौके पर राजिंदर ने कथित तौर पर “गलती हो गई” कहा, पर स्कूल प्रबंधन ने उसे तत्काल प्रभाव से कक्षाओं से हटा दिया।
छात्रा घर पहुंची तो सहमी-सी थी
छुट्टी के बाद जब छात्रा घर पहुंची, मां ने बेटी की आंखों में खौफ देखा। मां ने बताया, “वह कांप रही थी, बोलते हुए रो पड़ी। हमने तुरंत पिता को बुलाया और किशनगढ़ चौकी में शिकायत दर्ज करवाई।” थाना ग्रामीण ने धारा 354-A (यौन उत्पीड़न), 342 (गलत तरीके से बंधक रखना) और पॉक्सो एक्ट की संगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। एसएचओ दलबीर सिंह ने ‘समाचार भारत’ को बताया, “आरोपी फरार है, पर उसके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है। दो-तीन दिन में गिरफ्तारी संभव है।”
‘इससे पहले भी एक बच्ची…’
ग्रामीणों की याद अभी ताज़ा है—मात्र 20 दिन पहले पास के पारस एस्टेट में 13 वर्षीय बालिका की हत्या कर दी गई थी; आरोपी ने शव नाले में फेंका। उस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई और नया मामला सामने आ गया। सरपंच बलविंदर सिंह ने कहा, “सरकारी स्कूल तो गरीबों का आखिरी सहारा है। यदि वहां भी बच्चियां सुरक्षित नहीं, तो हमारा गांव शर्मसार है।” ग्रामीणों ने डीपी मास्टर की तत्काल गिरफ्तारी और स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है।
शिक्षा विभाग की चुप्पी, छात्रा के माता-पिता में रोष
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर (ग्रामीण) अशोक कुमार ने बताया कि आरोपी की सेवाएं तत्काल निलंबित कर दी गई हैं और जांच कमेटी गठित। परंतु पीड़ित छात्रा के पिता का सवाल है, “अगर प्रिंसिपल ने पहले ही गलती मान ली, तो पुलिस को सूचना तुरंत क्यों नहीं दी?” मानवाधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर ढिल्लों ने कहा, “स्कूलों में लैंगिक संवेदनशीलता ट्रेनिंग अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि कोई बच्चा ‘अच्छे-बुरे स्पर्श’ की पहचान कर सके।”
आगे का रास्ता: सजा या सुधार?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पीड़िता को तत्काल काउंसलिंग दी जाए, वरना डर भविष्य के शैक्षणिक वर्षों में भी उसका पीछा करेगा। वहीं, कानून विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पॉक्सो के तहत विशेष अदालत में तेज़ी से ट्रायल हो, ताकि न्याय की उम्मीद समाज में विश्वास बनाए रखे। गांव के बुज़ुर्गों ने पंचायत बुलाई है; यदि आरोपी 48 घंटे में पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया, तो वे स्कूल के सामने धरना देने की चेतावनी दे चुके हैं। फिलहाल, किशनगढ़ की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या हमारी बच्चियां अगली सुबह स्कूल जाने से पहले सुरक्षित महसूस करेंगी?



