Haryana Stamp Duty Free:हरियाणा की विधानसभा में जारी मानसून सत्र के दौरान. प्रदेश के सीएम नायब सिंह सैनी ने बुधवार को एक बड़ी घोषणा कर दी. अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बोला कि हरियाणा में मोदी सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana), राज्य सरकार की मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बांटे गए मकानों और 100 गज तक छोटे आवासीय भूखंडों पर अब किसी भी तरह की कोई स्टांप ड्यूटी नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सैनी की घोषणा हरियाणा में 27 अगस्त 2025 से Haryana Stamp Duty होगी जीरो
विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 27 अगस्त से प्रदेश भर में 100 गज से कम प्लॉटों के लिए स्टांप ड्यूटी जीरो कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि हरियाणा में जिन जगहों पर जमीन की कीमतों में 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है तो अब उन जगहों पर 50 फीसदी तक कलेक्टर रेट सरकार द्वारा बढ़ाया गया है जो कि वर्तमान में बाजार रेट से काफी कम भी है।
अब कलेक्टर दरों की वार्षिक समीक्षा और संशोधन जरूरी
सीएम सैनी ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर दरों की वार्षिक समीक्षा और संशोधन भी अधिक अनिवार्य है। इस कदम का उद्देश्य डीड पंजीकरण के दौरान संपत्ति मूल्यांकन में आने वाली हर तरह की अनियमितताओं को दूर करना है, जिसके कारण पहले के समय की सरकारों में राज्य के खजाने में भारी राजस्व नुकसान भी होता था।
हरियाणा में बिल्डर और भू-माफियाओं को हुआ मोटा मुनाफा
इस दौरान ख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पूर्व की सरकारों पर भी जमकर निशाना भी साधा। सीएम ने आगे कहा कि जिस तरीके से पूर्व की सरकारों ने हरियाण राज्य में कलेक्टर रेट बढ़ाए थे, उससे भू-माफियाओं और बिल्डरों को सीधा सीधा फायदा हुआ। ऐसे में आज के समय हरियाणा में यह जरूरी हो गया कि एक तय फार्मूले के तहत अलग-अलग इलाकों में कलेक्टर रेट में कुछ बढ़ोतरी की जाए।
क्या है Stamp Duty
आपको जानकारी के लिए बता दें कि यदि आप किसी भी जगह जमीन या घर खरीदते है तो आपको सरकार को स्टांप ड्यूटी के तौर पर कुछ रकम देनी होती है। Stamp Duty को नहीं देने पर जमीन या घर की रजिस्ट्री को किसी भी तरह से सरकारी नजर में वैध नहीं माना जाता है। हालांकि देश भर के अलग-अलग राज्यों में स्टांप ड्यूटी अलग-अलग भी होती है। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण इलाको के लिए भी स्टांप ड्यूटी Stamp Duty अलग-अलग होती है। आमतौर पर शहर में कुछ अधिक होती है जबकि ग्रामीण इलाकों में सस्ती होती है।
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