Haryana Crime News- कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद क्षेत्र में एक बार फिर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम ने दखल दी है। यह कार्रवाई अवैध हथियारों एवं गोला-बारूद के तस्करी नेटवर्क की जटिल जंजीरों को तोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। NIA जांच एजेंसी ने इस मामले के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले कमलकांत वर्मा उर्फ ‘अंकल जी’ के ड्राइवर की मदद से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित कई होटलों की तलाशी ली और उनके सीसीटीवी रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में लिया है।
गोपनीय कार्रवाई और नए सुराग:
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार की शाम NIA की पटना टीम संदिग्ध ड्राइवर शत्रुघन को अपने साथ लेकर कुरुक्षेत्र पहुंची। इस दल ने अपनी कार्रवाई को अत्यंत गोपनीय रखते हुए स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचना नहीं दी। हालांकि, बाद में एजेंसी के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी से औपचारिक रूप से भेंट की। माना जा रहा है कि यह कदम तत्काल सहयोग के लिए उठाया गया।
NIA की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी कमलकांत वर्मा इन्हीं होटलों का इस्तेमाल शाहाबाद क्षेत्र के एक गन हाउस संचालक के साथ गुप्त बैठकें करने के लिए करता था। इन बैठकों का मकसद हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े सौदों पर चर्चा और उन्हें अंजाम देना बताया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से इन बैठकों में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
NIA जांच के नए आयाम:
यह मामला केवल हथियार तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित अंतर्राज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है। एनआईए द्वारा ड्राइवर के बयान और डिजिटल सबूतों को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है। होटलों के रिकॉर्ड से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी व्यक्ति किन-किन लोगों से मिलता था, उसकी आवाजाही का रूट क्या था और इस पूरे तंत्र में अन्य कौन-कौन शामिल हो सकते हैं।
NIA एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, “यह जांच एक पहेली के टुकड़ों को जोड़ने जैसा है। हर नया सुराग हमें इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में मदद कर रहा है। सीसीटीवी फुटेज एक ठोस डिजिटल सबूत हो सकता है।”
फिलहाल, NIA की टीम अपनी जांच जारी रखे हुए है। संग्रह किए गए सबूतों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। इस कड़ी में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। यह मामला दर्शाता है कि देश के अंदरूनी इलाकों में भी अंतर्राज्यीय अवैध हथियार तस्करी के मजबूत तार जुड़े हुए हैं, जिन्हें उजागर करना समय की मांग है।
कुरुक्षेत्र की इस जांच का परिणाम न केवल इस विशेष मामले को सुलझाने में, बल्कि पूरे उत्तर भारत में सक्रिय ऐसे ही अन्य संदिग्ध नेटवर्कों पर प्रहार करने में एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। NIA एजेंसी की इस सक्रियता से यह संदेश जाता है कि ऐसे गंभीर अपराधों की जांच में अब डिजिटल साक्ष्यों पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है, जितना पारंपरिक तरीकों पर। अगले कुछ दिन इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।



