Mahapanchayat in Chandigarh: हरियाणा में एक वरिष्ठ दलित IPS Puran Kumar की आत्महत्या का मामला राज्य की राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक अमलों में गहरे दबाव और भेदभाव के गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसने सत्तारूढ़ दल के लिए एक राजनीतिक संकट भी पैदा कर दिया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने मामले की उचित जांच न होने पर आंदोलन की चेतावनी दे डाली है, जबकि दलित समुदाय ने आज चंडीगढ़ में एक बड़ी महापंचायत बुलाई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई
इन सबके बीच, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को पहली बार इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सैनी ने इस घटना को ‘अत्यंत दुखद’ करार देते हुए वादा किया कि सरकार एक गहन जांच कराएगी और दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, को कानून के कठोर दंड का सामना करना होगा। सीएम के इस बयान के बाद, चंडीगढ़ पुलिस ने देर रात परिवार की एक अहम मांग को स्वीकार करते हुए दर्ज प्राथमिकी में अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की एक कड़ी धारा जोड़ दी है।
IPS Puran Kumar का परिवार लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) को मामले में शामिल किया जाए। इस धारा का प्रावधान तब लागू होता है जब किसी अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य के साथ उसकी जाति के आधार पर कोई ऐसा अपराध किया जाए, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाए। इस गंभीर धारा के तहत दोषी को उम्रकैद की सजा का प्रावधान है, जबकि पहले दर्ज धाराओं में अधिकतम सजा का प्रावधान केवल पांच वर्ष तक का था।
IPS Puran Kumar के सुसाइड नोट में उजागर गंभीर आरोप
अधिकारी कुमार द्वारा छोड़े गए आत्महत्या नोट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। नोट में उन्होंने वर्ष 2020 से शुरू हुए व्यवस्थित भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव ने उनका उत्पीड़न शुरू किया, जिसे हरियाणा कैडर के अन्य अधिकारियों ने आगे बढ़ाया। नोट में पूर्व एसीएस गृह राजीव अरोड़ा पर उन्हें छुट्टियां न देने और बीमार पिता से मिलने तक जाने से रोकने का आरोप लगाया गया है।
IPS Puran Kumar ने यह भी लिखा कि उनके खिलाफ छद्म नामों से दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दर्ज कराई गईं और सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया गया। हैरानी की बात यह है कि उनकी ओर से की गईं खुद की शिकायतों की कभी उचित जांच तक नहीं हुई। उन पर सरकारी आवास और वाहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी अतिरिक्त पाबंदियां लगाई गईं और नवंबर 2023 में उनका सरकारी वाहन तक वापस ले लिया गया। अंततः इन सब हालातों ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
IPS Puran Kumar मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सामाजिक आक्रोश
IPS Puran Kumar के इस पूरे प्रकरण ने एक गहरा सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव पैदा किया है। कांग्रेस नेता राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला पूरे देश में चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अगले तीन दिनों में अपने सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का आदेश दिया है ताकि यह संदेश जाए कि पार्टी पीड़ित IPS Puran Kumar के परिवार के साथ खड़ी है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को पूरन कुमार के परिवार से मुलाकात कर उनके दुख में शरीक हुए।
इस बीच, हरियाणा सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया को, जिनका जिक्र सुसाइड नोट में था, उनके पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर सुरेंद्र सिंह भौरिया को नया एसपी नियुक्त किया गया है। सुसाइड नोट में नामित 15 सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ गुरुवार को ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जिनमें वर्तमान डीजीपी शत्रुजीत कपूर का नाम भी शामिल है। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गहन सामाजिक और राजनीतिक परीक्षा का विषय बन गया है, जिसका हल निकालना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।



