DreamFolks Services Shares, नई दिल्ली: देश भर में एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा देने वाली कंपनी DreamFolks Services के शेयरों ने आज, 17 सितंबर को बुधवार के शेयर कारोबार की बंपर शुरुआत की। लेकिन यह शुरुआत तेजी की नहीं, बल्कि 5% के बड़े लोअर सर्किट के साथ हुई, जहां शेयर की कीमतें 131 रुपये तक आ गईं। यह अचानक घाटा कंपनी के एक बड़े फैसले की वजह से लगा, जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया।
DreamFolks Services कंपनी ने मंगलवार देर शाम स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी देते हुए ऐलान किया कि वह घरेलू एयरपोर्ट लाउंज के बिजनेस से तत्काल प्रभाव से अब बाहर निकल रही है। जिसका सीधा सा मतलब है कि अब कंपनी के क्लाइंट्स (जैसे बैंक और कार्ड कंपनियां) अपने ग्राहकों को घरेलू लाउंज की सुविधा उपलब्ध नही कर पाएंगे। हालांकि, DreamFolks Services कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका अंतरराष्ट्रीय (ग्लोबल) लाउंज बिजनेस और घरेलू एयरपोर्ट की दूसरी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
DreamFolks Services ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
यह फैसला एकदम से नहीं आया। बीते कुछ हफ्तों से बाजार में सूत्रों के साथ अफवाहें थीं कि कई बड़े ट्रैवल और फूड सर्विस प्रदाताओं ने DreamFolks Services के साथ अपने करार खत्म कर दिए हैं। इस सूची में अदाणी डिजिटल, सेमोलिना किचन और एंकाल्म हॉस्पिटैलिटी जैसे बड़े नाम शामिल थे।
मामले की जड़ तब और गहराई से मिली जब कंपनी की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) लिबरथा पीटर कल्लट ने एक इंटरव्यू में एक बहुत बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट ऑपरेटर्स उनके क्लाइंट्स पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे DreamFolks Services के साथ मौजूदा करारों से पीछे हट जाएं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कंपनी को अप्रत्यक्ष रूप से अधिग्रहण के ऑफर भी कई मिले हैं।
इसके ठीक एक दिन बाद, अदाणी एयरपोर्ट्स के सीईओ ने एक लिंक्डइन पोस्ट में बिना नाम लिए साफ इशारा किया कि अब लाउंज एक्सेस के लिए बिचौलियों (एग्रीगेटर्स) की जरूरत बिलकुल नहीं है और यह सुविधा सीधे एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के जरिए भी दी जा सकती है।
DreamFolks Services निवेशकों में मची खलबली
निवेशक इस खबर से बेहद नाराजगी भी जता रहे हैं। DreamFolks का बिजनेस मॉडल ही घरेलू लाउंज एक्सेस पर केंद्रित था और इसके अचानक बंद होने से कंपनी के राजस्व पर बड़ा भारी असर पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि आज सुबह शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों ने शेयरों को बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतें लुढ़ककर लोअर सर्किट तक आ गईं।
आंकड़ो में देखें तो बीते कुछ महीनों में यह शेयर 40% से भी ज्यादा गिर चुका है। ऐसा लगता है कि एयरपोर्ट ऑपरेटर्स और एग्रीगेटर्स के बीच की यह तकरार अब सीधे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी भारी पड़ रही है। अब सवाल यह है कि क्या DreamFolks अपने ग्लोबल बिजनेस और दूसरी सेवाओं से इस झटके को संभाल पाएगी, या फिर यह बदलाव कंपनी के भविष्य के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत भी साबित होगा।


