UGC New Rule: नई दिल्ली- यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” ने देशभर के कैंपस में भूचाल ला दिया है। प्रावधान है कि हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में SC/ST/OBC/दिव्यांग तथा महिलाओं की प्रतिनिधित्व वाली ‘इक्विटी कमेटी’ बनेगी, जो जातिगत भेदभाव की शिकायतों का 15 दिन में निपटारा करेगी। शिकायतें बढ़ने का आधिकारिक आंकड़ा भी है—2019-20 में 173 मामले, 2023-24 में 378; यानी 118.4% की वृद्धि। लेकिन सवर्ण छात्रों का आरोप है कि नियम “एकतरफा” हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है।
UGC New Rule पर सरकार का ताज़ा रुख : दुरुपयोग नहीं होने देंगे
संसद के बजट सत्र से ठीक पहले केंद्र ने स्पष्ट किया कि नियम “किसी एक वर्ग के खिलाफ” नहीं हैं। एक वरिष्ठ मानव संसाधन मंत्रालय अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम जल्दी ही विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करेंगे। इक्विटी कमेटी में सभी श्रेणियों के प्रतिनिधि होंगे; जनरल कैटेगरी के छात्र भी निष्पक्ष सुनवाई पा सकेंगे।” बृहस्पतिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, “किसी भी नियम का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा; भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
UGC New Rule का विरोध क्यों? ‘सवर्ण भी भेदभाव झेलते हैं’
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कई परिसरों में छात्रों ने पोस्टर लगाए—”इक्विटी कमेटी या इनक्वायरी कमेटी?” उनका तर्क है कि UGC New Rule में सिर्फ SC/ST/OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है, जबकि सवर्ण छात्रों को भी कई बार ‘आरक्षण-विरोधी’ टिप्पणियों का शिकार होना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है, “नियम UGC अधिनियम की समान अवसर की धारा का उल्लंघन है; किसी भी छात्र को झूठी शिकायत से बचाने के लिए सेफगार्ड नहीं हैं।”
UGC New Rule पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग
चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने जल्दी सुनवाई की अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में नियम को रद्द करने या कम से कम “सभी वर्गों के लिए समान प्रक्रिया” जोड़ने की मांग है।
UGC New Rule में संतुलन की जरूरत
UGC का कहना है कि नियम सिर्फ सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए हैं, पर विरोध दिखा रहा है कि सुरक्षा भी पक्षपाती न हो। अब सरकार का विस्तृत स्पष्टीकरण और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तय करेगी कि ‘इक्विटी’ का मतलब सिर्फ़ एक वर्ग की सुरक्षा है या सभी के लिए समान अवसर। फिलहाल, कैंपस में बहस जारी है—समानता लानी है तो भरोसा भी दोनों तरफ होना चाहिए।



