Rajasthan Agricultural : राजस्थान की कृषि अनुसंधान संस्था (Rajasthan Agricultural) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की पहली ‘थ्री-वे हाइब्रिड’ बाजरा किस्म विकसित की है। दुर्गापुरा, जयपुर स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस किस्म को ‘आरएचबी 273’ नाम दिया गया है। यह किस्म कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए जोखिम कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती है।
- Rajasthan Agricultural में वैज्ञानिकों की अनोखी खोज
- Rajasthan Agricultural के इतिहास में यह किस्म तीन मोर्चों पर श्रेष्ठ प्रदर्शन
- Rajasthan Agricultural में किसानों के लिए होगी लाभदायक
- राष्ट्रीय स्वीकृति एवं भविष्य
- Rajasthan Agricultural में नई पहल
- परीक्षण और उत्पादन क्षमता
- रोग प्रतिरोधक क्षमता
- किसानों और स्वास्थ्य के लिए लाभ
Rajasthan Agricultural में वैज्ञानिकों की अनोखी खोज
राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI), दुर्गापुरा के वैज्ञानिकों ने बाजरे की दुनिया की पहली थ्री-वे हाइब्रिड किस्म आरएचबी 273 (RHB 273) विकसित की है। यह किस्म कम वर्षा वाले इलाकों में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। सूखा और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी होने के साथ यह किस्म पारंपरिक बाजरे की तुलना में 28 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन देती है।

Rajasthan Agricultural के इतिहास में यह किस्म तीन मोर्चों पर श्रेष्ठ प्रदर्शन
उच्च उत्पादन, सूखा एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता, तथा उत्तम पोषण गुणवत्ता। तीन वर्षों के व्यापक परीक्षणों में इसने मौजूदा लोकप्रिय किस्मों (Rajasthan Agricultural) की तुलना में 13 से 28 प्रतिशत अधिक, यानी प्रति हेक्टेयर 22 से 25 क्विंटल तक उत्पादन दिया है। साथ ही, यह अत्यंत कम अवधि में तैयार हो जाती है। इसकी फसल मात्र 75-76 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को फसल चक्र में लचीलापन मिलता है।
Rajasthan Agricultural में किसानों के लिए होगी लाभदायक
‘आरएचबी 273’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘थ्री-वे हाइब्रिड’ होना है, जिसका अर्थ है कि यह केवल अनाज उत्पादन में ही बेहतर नहीं है। यह पशुपालक किसानों के लिए भी लाभप्रद है, क्योंकि यह प्रति हेक्टेयर 48-50 क्विंटल तक उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक चारा (भूसा) भी प्रदान करती है। इसके अलावा, यह बाजरे की घातक बीमारियों जैसे डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है, जिससे फसल सुरक्षित (Rajasthan Agricultural) रहती है।
राष्ट्रीय स्वीकृति एवं भविष्य
इस उल्लेखनीय विकास को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भी मान्यता दी है। मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी देशभर (Rajasthan Agricultural) के लिए 184 उन्नत फसल किस्मों की सूची में ‘आरएचबी 273’ को भी शामिल किया गया है। यह किस्म विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात व हरियाणा के उन शुष्क क्षेत्रों के लिए वरदान सिद्ध होगी, जहां वार्षिक वर्षा 400 मिमी से भी कम होती है।
Rajasthan Agricultural में नई पहल
अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान आईसीआरआईएसएटी के सहयोग से विकसित यह किस्म जलवायु परिवर्तन और सूखे की चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प प्रस्तुत करती है। यह न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करते हुए शुष्क क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
परीक्षण और उत्पादन क्षमता
तीन वर्षों तक किए गए परीक्षणों में आरएचबी 273 ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।
प्रति हेक्टेयर 22 से 25 क्विंटल तक अनाज उत्पादन
मौजूदा किस्मों की तुलना में 13 से 28 प्रतिशत अधिक उपज
जल्दी पकने वाली किस्म, मात्र 75 से 76 दिनों में तैयार
प्रति हेक्टेयर 48 से 50 क्विंटल तक उच्च गुणवत्ता वाला भूसा
रोग प्रतिरोधक क्षमता
यह किस्म बाजरे की प्रमुख बीमारियों जैसे डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इससे फसल नुकसान का जोखिम काफी कम हो जाता है।
किसानों और स्वास्थ्य के लिए लाभ
आरएचबी 273 न केवल किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर चारा उपलब्ध कराती है, बल्कि पोषण तत्वों से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है। इसकी थ्री-वे हाइब्रिड विशेषता—उत्पादन, सहनशीलता और गुणवत्ता—किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करती है।



