DRDO LR-AShM नई दिल्ली, 25 जनवरी 2025 गणतंत्र दिवस की परेड इस बार सिर्फ़ रंगारंग झांकियों तक सीमित नहीं रहेगी। जब 26 जनवरी को DRDO का ट्रक-माउंटेड ‘लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल’ (LR-AShM) कर्तव्य पथ पर गुजरेगा, तो दुनिया देखेगी कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो चुका है जो हवा से पाँच गुना तेज़ ‘स्क्रैमजेट’ हथियार बना सकते हैं। यह मिसाइल सिर्फ़ दुश्मन के युद्धपोतों को डुबोने की ताकत नहीं रखती, बल्कि जमीनी ठिकानों को भी पलक झपकते ध्वस्त कर सकती है।
DRDO का ‘हाइपरसोनिक ब्रह्मास्त्र से समुद्र-ज़मीन, दोनों पर कहर
DRDO के LR-AShM की मारक क्षमता 1,500 किलोमीटर तक है। इसका मतलब यह कि भारतीय तट से उड़ान भरकर यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों में किसी भी विदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर या युद्धपोत को निशाना बना सकती है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक़, मिसाइल का टेस्ट प्लेटफ़ॉर्म ओडिशा तट पर पहले ही सफल उड़ान भर चुका है; परेड में दिखाया जा रहा लॉन्चर वही प्रोटोटाइप है। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक (नाम गुप्त रखा गया) ने बताया, “टेक-ऑफ के बाद यह मच 5 की रफ़्तार पार करता है। टर्मिनल चरण में एल्यूमिनियम-आधारित चाफ़ क्लाउड छोड़कर इन्फ्रारेड सीकर को भ्रमित करता है, इसलिए इंटरसेप्शन की संभावना बेहद कम है।”
DRDO का ‘हाइपरसोनिक ब्रह्मास्त्र रडार से पहले, लक्ष्य पर वार
हाइपरसोनिक स्पीड और लो-रडार क्रॉस-सेक्शन डिज़ाइन की बदौलत LR-AShM दुश्मन के रडार की पकड़ से पहले ही लक्ष्य तक पहुँच जाती है। भारतीय सीमाओं के भीतर से दागी जा सकने वाली इस मिसाइल की मार पाकिस्तान के मुल्तान-पेशावर से लेकर चीन के कई प्रमुख शहरों तक पहुँच सकती है। यह क्षमता भारत को ‘स्टैंड-ऑफ’ हमले की सुविधा देती है—यानी बिना अपने जेट या जहाज़ को दुश्मन की पहुँच में लाए ही वार कर सकते हैं।
DRDO से देश की रक्षा की नई ऊँचाई
26 जनवरी को DRDO के LR-AShM की झलक सिर्फ़ सेल्यूट के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को यह संदेश देने के लिए भी है कि भारत अब समुद्र, ज़मीन और वायु—तीनों मोर्चों पर प्रतिद्वंद्वियों को चेताने की स्थिति में है। जब मिसाइल कर्तव्य पथ पर गुजरेगी, तो वह सिर्फ़ ध्वनि की गति नहीं, देश की आत्मनिर्भर रक्षा की गति भी दिखाएगी।



