haryana news in hindi, गुरुग्राम। Dwarka Expressway की टनल, जिसे राजधानी दिल्ली को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ने के उद्देश्य से बनाया गया है, अब अपनी योजना की सीमाओं को छूने लगी है। चालू होने के महज छह महीने के भीतर ही इस टनल से प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या एक लाख 84 हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि इसका डिजाइन अधिकतम ढाई लाख वाहनों के दैनिक आवागमन को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया था। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने इस स्थिति को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की योजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Dwarka Expressway टनल की संरचना और उद्देश्य
Dwarka Expressway का विस्तार खेड़कीदौला टोल प्लाजा से लेकर महिपालपुर स्थित शिवमूर्ति तक है। इस एक्सप्रेसवे को सीधे हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए यशोभूमि के समीप एक भूमिगत टनल का निर्माण किया गया, जो एयरपोर्ट के निकट समाप्त होती है। इस टनल का उद्देश्य दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात को सुगम बनाना और हवाई अड्डे तक पहुंच को तेज करना था।
UER-2 से जुड़ाव के बाद बढ़ा दबाव
हाल ही में Dwarka Expressway को यूईआर-दो (अर्बन एक्सटेंशन रोड-2) से जोड़ दिया गया है, जिससे टनल में वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, 15 अक्टूबर को टनल से एक लाख 40 हजार वाहन गुजरे, जबकि 16 अक्टूबर को यह संख्या एक लाख 60 हजार से अधिक रही। 17 अक्टूबर को यह आंकड़ा एक लाख 84 हजार पार कर गया। यदि यही प्रवृत्ति बनी रही, तो अगले एक वर्ष में टनल की अधिकतम क्षमता को भी पार हो सकती है।
विशेषज्ञों की चिंता और स्थानीय अनुभव
सेक्टर-40 निवासी और पेशे से इंजीनियर हरदीप सिंह ने बताया कि पीक आवर के दौरान टनल में पहले से ही भारी दबाव देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “अभी कई लोगों को यह जानकारी नहीं है कि यूईआर-दो Dwarka Expressway से जुड़ा है, फिर भी यातायात इतना अधिक है। यदि एक वाहन भी टनल में खराब हो जाए, तो सेकंडों में लंबा जाम लग सकता है।”
पूर्व तकनीकी सलाहकार जेएस सुहाग ने एनएचएआई की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब अधिकारियों को पहले से पता था कि यूईआर-दो को द्वारका एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, तो टनल के डिजाइन में आवश्यक बदलाव क्यों नहीं किए गए? NHAI की नीति के अनुसार, हर परियोजना की योजना अगले 30 वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यदि एक साल में ही योजना विफल होने की आशंका है, तो यह अनुभव की कमी और लापरवाही का संकेत है।”
NHAI की प्रतिक्रिया
NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टनल में बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही समीक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूईआर-दो से कई हाईवे और एक्सप्रेसवे जुड़ने के कारण एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हुआ है, लेकिन इससे टनल पर अप्रत्याशित दबाव भी पड़ा है। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि इस चुनौती से निपटने के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Dwarka Expressway टनल की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि योजना निर्माण में दीर्घकालिक दृष्टिकोण की कमी रही है। बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए अब आवश्यक हो गया है कि एनएचएआई इस परियोजना की समीक्षा करे और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक कदम उठाए। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह टनल न केवल यातायात बाधा का कारण बनेगी, बल्कि राजधानी क्षेत्र की गतिशीलता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।



