Haryana Crime News,चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में नशीले पदार्थों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए एक अनूठी और मानवीय रणनीति अपनाई है। अब नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं की स्क्रीनिंग करके नशा तस्करी के जाल को उजागर किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य केवल दबिश तक सीमित न रहकर नशे की जड़ तक पहुंचना और युवाओं को पुनः समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई नशा मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
हरियाणा सरकार ऐसे तय करेगी स्क्रीनिंग से सप्लाई चेन तक का सफर
इस नई रणनीति के तहत, नशे का शिकार हुए युवाओं की वैज्ञानिक तरीके से स्क्रीनिंग की जाएगी। इस प्रक्रिया में यह पता लगाया जाएगा कि युवा नशा कहां से और किन स्रोतों से प्राप्त कर रहे हैं। यह जानकारी नशा तस्करी की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को उजागर करने में मील का पत्थर साबित होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह दृष्टिकोण नशे के खिलाफ लड़ाई में एक बदलाव लाएगा। अब तक हम आपूर्ति पर केंद्रित थे, लेकिन अब हम मांग पैदा करने वाले कारणों और उसकी पूर्ति करने वाले तंत्र दोनों पर एक साथ कार्य करेंगे।” इससे न केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को बल मिलेगा, बल्कि नशामुक्ति के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों को भी नई दिशा मिलेगी।
हरियाणा में प्रोत्साहन और जवाबदेही का संतुलन
पुलिस तंत्र की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष पहल की गई है। जिन पुलिस थाना क्षेत्रों में नशे के खिलाफ कार्यवाही सराहनीय पाई जाएगी, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इसके विपरीत, जहां लापरवाही या ढिलाई बरती गई है, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि “नशा मुक्त घोषित किए गए गांवों का नियमित पुनर्मूल्यांकन किया जाए, ताकि उनकी स्थिति में सुधार बनाए रखा जा सके।” इसके अलावा, पंचायतों को भी इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। नशामुक्ति में अग्रणी भूमिका निभाने वाली पंचायतों और सरपंचों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर भी इस मुहिम को गति मिले।
हरियाणा सीमाओं पर कड़ी निगरानी और विशेषज्ञ टीमों की भूमिका
नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ लगती हरियाणा की सीमाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की इन क्षेत्रों में मौजूदगी और क्षमता को बढ़ाया जाएगा। साथ ही, नशा नियंत्रण के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों को टीमों में शामिल करके आपूर्ति मार्गों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। गृह सचिव डॉ. सुमित्रा मिश्रा ने बताया कि “यह एक एकीकृत दृष्टिकोण है, जिसमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सेवा विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे। हमारा लक्ष्य नशे की मांग और आपूर्ति दोनों को कम करना है।”
हरियाणा सरकार का यह प्रयास दर्शाता है कि नशे जैसी सामाजिक बुराई से लड़ना केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। युवाओं की स्क्रीनिंग, पुलिस की सक्रियता, पंचायतों की भागीदारी और सीमाओं पर कड़ी निगरानी से एक ऐसा वातावरण बनाने में मदद मिलेगी, जहां युवा नशे के चंगुल से बाहर निकल सकें। भविष्य में, इस अभियान के सकारात्मक परिणाम न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकते हैं। एक नशा मुक्त समाज की ओर यह सुनियोजित कदम राज्य के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।



