Haryana news- हरियाणा के सिरसा जिला इन दिनों डेंगू बुखार की भयावह चपेट में है। मच्छरजनित इस बीमारी ने यहाँ के लोगों की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के आँकड़े लगातार चिंता का सबब बने हुए हैं, और अब तो इसने एक और जान ले ली है। रानियां क्षेत्र के गाँव चकराइयां के एक 43 वर्षीय किसान की डेंगू के इलाज के दौरान अस्पताल में मृत्यु हो गई है, जिसने पूरे परिवार पर एक गहरा सदमा थोप दिया है।
एक मौत ने बढ़ाई चिंता
यह दुखद घटना बीती रात की है, जब गुरमेल सिंह नाम के इस शख्स ने अंतिम साँसें लीं। वह एक साधारण किसान थे और अपने परिवार के एकमात्र सहारे थे। उनकी मृत्यु ने न सिर्फ उनके तीन नाबालिग बच्चों का सहारा छीन लिया है, बल्कि पूरे गाँव में एक मातम छा गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार इस अकाल मौत पर स्तब्ध हैं। यह मामला उस चिंताजनक तस्वीर का एक हिस्सा है, जिसमें जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या लगभग 600 के आस-पास पहुँच चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारी इस बढ़ती संख्या को लेकर चिंतित हैं।
पहले भी दस्तक दे चुका है मौत का साया
गुरमेल सिंह की मौत डेंगू से होने वाली पहली मौत नहीं है। इससे पहले भी जिले में वायरल बुखार और संदिग्ध डेंगू के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। औटू में एक भाई-बहन की मौत ने समुदाय को झकझोर दिया था। इसी तरह, ओढ़ां की एक नन्ही बच्ची और अहमदपुर की एक 13 वर्षीय किशोरी ने भी इस जानलेवा बीमारी के आगे अपनी जंग हार गई थी। ये लगातार हो रही मौतें एक बार फिर इस ओर इशारा कर रही हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक साबित हो रही है और इसे रोकने के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
डेंगू के लिए स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें और चुनौतियाँ
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फॉगिंग और जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। टीमें लगातार घर-घर जाकर डेंगू के सैंपल एकत्र कर रही हैं और लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय बता रही हैं। सरकारी अस्पतालों में डेंगू वार्ड सक्रिय हैं और मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालाँकि, इन सबके बावजूद मामलों में जिस तेजी से इजाफा हो रहा है, उससे स्पष्ट है कि अभियान अपनी मंज़िल तक पहुँचने में अभी पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। मच्छरों के पनपने के स्रोतों को पूरी तरह खत्म करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सिरसा में डेंगू की स्थिति ने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। गुरमेल सिंह जैसे लोगों की मौत इस बात का कड़ा संदेश है कि इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता। केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। इस लड़ाई में जनता की सक्रिय भागीदारी अहम है। हर नागरिक का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने घर और आस-पास पानी जमा न होने दे, मच्छरदानी का उपयोग करे और बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे। आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव के साथ यह खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में सतर्कता और सहयोग ही इस जानलेवा बीमारी पर विजय पाने की कुंजी साबित होगी।



