Haryana News- यमुनानगर के प्रतापनगर क्षेत्र स्थित चार चावल मिलों में सरकारी धान की बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला सामने आया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक की टीम ने इन मिलों पर लगभग चार से पांच घंटे तक चले सघन छापे के बाद करीब 42 करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी धान में गड़बड़ी का पर्दाफाश किया है। यह घटना सरकारी अनाज के भंडारण और प्रबंधन व्यवस्था में चिंताजनक चूक की ओर इशारा करती है।
छापेमारी में खुली पोल
विभाग की टीम ने गुरुवार को प्रतापनगर स्थित चार चावल मिलों – अंजनी नंदन एग्रो फूड्स, बद्री विशाल एग्रो फूड्स, मोरवी नंदन एग्री फूड्स और श्री जी एग्री फूड्स – पर एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की। इस दौरान टीम ने मिलों में मौजूद धान का भौतिक सत्यापन किया, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। खाद्य एवं आपूर्ति इंस्पेक्टर विनोद कुमार द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर थाना प्रतापनगर में इन चारों मिलों के संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
कैसे हुई थी चावल खरीद में धोखाधड़ी?
शिकायत के अनुसार, इन चारों मिलों को सरकारी धान की आपूर्ति की गई थी, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान धान की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई। जांच में पता चला कि अंजनी नंदन एग्रो फूड्स के पास हैफेड गोदाम में 5992 मीट्रिक टन और बिलासपुर में 3855.52 मीट्रिक टन धान था, जो रिकॉर्ड से कम था। इसी प्रकार बद्री विशाल एग्रो फूड्स में खाद्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 6108 मीट्रिक टन धान होना चाहिए था, लेकिन प्रतापनगर, सरस्वती नगर और रंजीतपुर स्थित गोदामों में केवल 6954 बैग चावल ही बरामद हुए।
जांच तेज, कार्रवाई की तैयारी
श्री जी एग्री फूड्स के मामले में भी 5994.56 मीट्रिक टन धान और रंजीतपुर में चावल के केवल 130 बैग ही मिले। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह एक गंभीर मामला है। हम पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहे हैं। सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि सरकारी धान में हेराफेरी की यह घटना राजस्व की दृष्टि से भी एक बड़ा नुकसान है।
यमुनानगर की यह घटना सरकारी संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती को एक बार फिर उजागर करती है। खाद्य विभाग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए जो कदम उठाए हैं, वह भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। आने वाले दिनों में विभाग द्वारा और भी मिलों की जांच करने की योजना है। इस घोटाले ने जिले में चावल मिलों के संचालन पर नजर रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विभाग का कहना है कि वह इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने पर काम कर रहा है।



