SYL Canal Dispute: सतलुज-यमुना लिंक (SYL Canal Dispute) नहर विवाद को लेकर आज चंडीगढ़ में एक बार फिर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक की विशेषता यह है कि इसमें केंद्र सरकार का कोई मंत्री शामिल नहीं होगा। बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
दशकों से लंबित सतलुज-यमुना लिंक (SYL Canal Dispute) नहर विवाद को सुलझाने की दिशा में आज एक नया और महत्वपूर्ण दौर शुरू हो रहा है। आज चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच सीधी द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केंद्र सरकार के किसी मंत्री या अधिकारी की सीधी मौजूदगी नहीं होगी, जो केंद्र सरकार द्वारा अपनी मध्यस्थता वापस लेने के संकेत को और पुष्ट करता है।
SYL Canal Dispute को लेकर महत्वपूर्ण बैठक
यह इस वर्ष की पहली और पिछले तीन दौर की विफल वार्ताओं के बाद होने वाली (SYL Canal Dispute) महत्वपूर्ण बैठक है। वर्ष 2024 में जुलाई, अगस्त और नवंबर महीने में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में दिल्ली में तीन बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन उनमें कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद केंद्र ने पंजाब और हरियाणा के बीच पांच दौर की द्विपक्षीय बातचीत भी करवाई थी, लेकिन वह भी निर्णायक परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।
SYL Canal Dispute पर केंद्र की भूमिका
नवंबर 2024 की अंतिम बैठक के बाद से ही केंद्र सरकार के रुख में बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि वे आपसी बातचीत के माध्यम से इस विवाद का समाधान खोजें। इसी कड़ी में, 17 नवंबर को फरीदाबाद में हुई उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नदी जल (SYL Canal Dispute) से जुड़े सभी मुद्दों को फिलहाल स्थगित कर दिया था। यह कदम केंद्र द्वारा इस मामले में सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाने की नीति को दर्शाता है।
SYL Canal Dispute दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे
आज की इस शीर्ष-स्तरीय बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र के सीधे दखल के बिना यह द्विपक्षीय वार्ता दोनों पक्षों पर सीधी जिम्मेदारी डालती है। यदि इस बैठक में कोई सकारात्मक प्रगति होती है, तो यह लंबे समय से अटके इस जल विवाद (SYL Canal Dispute) को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी सफलता होगी। हालांकि, दोनों राज्यों की ऐतिहासिक और राजनीतिक मांगों में अंतर को देखते हुए यह मार्ग आसान नहीं होगा। पूरे देश की निगाहें आज चंडीगढ़ में होने वाली इस बैठक के परिणाम पर टिकी हैं।



