HARYANA HALCHAL – हरियाणा की राजनीति में इन दिनों एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष राव नरेंद्र पर लगे आरोपों के बाद पूरी पार्टी एकजुट होकर उनके समर्थन में खड़ी नज़र आ रही है। इस एकजुटता को और मजबूती देने के लिए 3 नवंबर को चंडीगढ़ में एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में न केवल वर्तमान संकट पर चर्चा होगी, बल्कि आने वाले समय की रणनीति भी तय की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में नया ताप पैदा कर दिया है।
पार्टी का समर्थन और आगामी रणनीति
रविवार को चंडीगढ़ और पंचकूला में पूर्ण कुमार की शोक सभा में शामिल होने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र ने आगामी बैठक की पुष्टि की। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और सह-प्रभारी जितेंद्र बघेल व प्रफुल्ल गुडधे भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक का प्रमुख एजेंडा राव नरेंद्र के समर्थन में एक ठोस आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना है।
इस क्रम में जिला स्तर पर प्रदर्शन, विधानसभा सत्र के दौरान घेराव, और एक साथ मुखर होने जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या सभी जिलों में एक समान रणनीति अपनाई जाएगी या फिर अलग-अलग जिलों के हिसाब से अलग प्लान बनाया जाएगा। इस पर बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जिलाध्यक्षों की भूमिका और पार्टी आंतरिक स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति सीधे तौर पर पार्टी हाईकमान, जिसमें राहुल गांधी और अन्य राष्ट्रीय नेता शामिल हैं, की देखरेख में हुई है। इस कारण इन पर पार्टी हाईकमान की ओर से जारी किए गए निर्देशों का पालन करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। 3 नवंबर की बैठक में लिए गए फैसले के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जिला स्तर पर पार्टी की तैयारियां किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।
यह उल्लेखनीय है कि राव नरेंद्र ने पार्टी के कई दिग्गज नेताओं को पछाड़कर हरियाणा कांग्रेस की कमान संभाली थी। हालांकि, उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल होने के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर इनेलो और भाजपा, ने कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं।
विधानसभा सत्र में विपक्ष की तैयारी
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगामी विधानसभा सत्र में कांग्रेस, राज्य सरकार से फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था की विफलता जैसे मुद्दों पर जवाब मांगेगी। राव नरेंद्र ने इस संबंध में कहा कि पार्टी अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर सक्रिय होकर लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने ‘वोट चोर-गद्दी छोड़ो’ अभियान को नेताओं की जमीनी पकड़ की परीक्षा बताया। इस अभियान के तहत प्रत्येक सांसद, विधायक और पदाधिकारी को एक निश्चित संख्या में हस्ताक्षर एकत्रित करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट 30 अक्टूबर तक प्रदेश कार्यालय में जमा करनी थी। आगामी बैठक में इस अभियान की प्रगति और आगे की रणनीति पर भी चर्चा होनी तय है।
चार्जशीट का मामला और आरोप-प्रत्यारोप
यह मामला लगभग 12 साल पुराना है, जब राव नरेंद्र तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पलवल की लगभग 30 एकड़ जमीन के लैंड यूज में बदलाव (CLU) के बदले 30 से 50 करोड़ रुपये की मांग के आरोप में उनके खिलाफ 483 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। यह मामला originally इनेलो द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन से उजागर हुआ था, जिसमें तत्कालीन पांच मंत्रियों और विधायकों पर आरोप लगे थे।
राव नरेंद्र ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा सरकार द्वारा बदले की राजनीति के तहत यह पुराना मामला फिर से गर्म किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह न्यायालय का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
तीन नवंबर की बैठक हरियाणा कांग्रेस के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। एक तरफ जहां पार्टी अपने नेता के समर्थन में एकजुटता दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इस मौके का फायदा उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश में हैं। ऐसे में, यह बैठक न केवल राव नरेंद्र के भविष्य, बल्कि हरियाणा में कांग्रेस की आगामी राजनीतिक रणनीति की दिशा भी तय करेगी। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस चुनौती का सामना करने में कितना सफल हो पाती है और क्या वह विपक्षी दलों के हमलों का मजबूती से जवाब दे पाती है।



