हरियाणा हलचल डेस्क – नई दिल्ली प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना- पारंपरिक दस्तकारी और शिल्प कौशल से जुड़े परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में अहम संशोधन करते हुए अब इसका लाभ सीधे कारीगरों और शिल्पकारों तक ही सीमित न रखकर उनकी अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा। संशोधित योजना के तहत अब इन परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा जारी रखने और आवागमन की सुविधा के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य इन समुदायों को आर्थिक रूप से सबल बनाने के साथ-साथ उनके बच्चों के भविष्य को शिक्षा एवं बेहतर रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में बेटियों की सुरक्षा और शिक्षा पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के नए स्वरूप की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि पहले केवल कारीगर ही लाभार्थी थे, लेकिन अब उनके बच्चों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों के लिए प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा, “यदि किसी पंजीकृत कारीगर की बेटी कॉलेज में अध्ययनरत है, तो उसे एक इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने के लिए 50,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह कदम उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जहां बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित आवागमन एक प्रमुख चिंता का विषय रहता है।”
दैनिक कार्यों में सहायक उपकरणों के लिए प्रोत्साहन
कारीगरों के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए भी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में प्रावधान रखे गए हैं। अधिकारी के अनुसार, यदि कोई कारीगर अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए साइकिल खरीदना चाहता है तो उसे 5,000 रुपये की सहायता मिलेगी। इसी तरह, यदि कोई महिला शिल्पकार सिलाई का कार्य शुरू करना चाहती है तो उसे सिलाई मशीन खरीदने के लिए 4,500 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सहायताओं का उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना और उनकी कार्य क्षमता में वृद्धि करना है।
शैक्षिक प्रोत्साहन राशि से बच्चों को मिलेगा बल
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का एक प्रमुख आयाम कारीगर परिवारों के बच्चों की शिक्षा को निर्बाध जारी रखने में मदद करना है। इसके लिए कक्षा और पाठ्यक्रम के स्तर के आधार पर प्रोत्साहन राशि तय की गई है। नौवीं, दसवीं कक्षा और डिप्लोमा के विद्यार्थियों को 10,000 रुपये, जबकि ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्रों को 12,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। स्नातक, पॉलिटेक्निक, एएनएम, जीएनएम जैसे पाठ्यक्रमों के लिए यह राशि 15,000 रुपये निर्धारित की गई है। इंजीनियरिंग और फार्मेसी के छात्रों को 20,000 रुपये, जबकि एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस जैसे चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 21,000 रुपये वार्षिक की सहायता मिलेगी।
पारंपरिक व्यवसायों का हो रहा है पुनरुद्धार
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का मूल लक्ष्य देश के 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को सशक्त बनाना है। इनमें लोहार, सुनार, बढ़ई, मोची, दरजी, नाई, राजमिस्त्री, मूर्तिकार, बुनकर जैसे व्यवसाय शामिल हैं। योजना के तहत इन कारीगरों को 3 लाख रुपये तक का बिना किसी गारंटी के ऋण, आधुनिक उपकरणों के लिए 15,000 रुपये तक की टूलकिट सहायता और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
इस संशोधित प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को सामाजिक-आर्थिक समावेशन की एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल पारंपरिक कौशल के धारकों को सम्मान और सहायता देती है, बल्कि उनकी अगली पीढ़ी को शिक्षा के जरिए नए अवसरों से जोड़कर एक सुरक्षित भविष्य के रास्ते खुलते है। इससे एक ओर जहां देश की समृद्ध शिल्प परंपरा का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर इन समुदायों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।



