नई दिल्ली, 20 नवंबर 2025 – देशभर में टोल टैक्स की कैशलेस व्यवस्था को सुगम बनाने वाले FASTag ने पिछले छह वर्षों में करीब 8 करोड़ वाहन चालकों की यात्रा को बिना रुकावट का बना दिया। रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित इस स्टिकर से लैस वाहन टोल प्लाज़ा पर सिर्फ कुछ सेकंड में गुजर जाते हैं, लेकिन जब गाड़ी बिक जाती है या टैग क्षतिग्रस्त हो जाता है तो उपयोगकर्ता के मन में सबसे पहला सवाल उठता है—‘अब इस खाते को कैसे बंद करें और बचा हुआ बैलेंस कैसे वापस मिलेगा?’ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, हर माह औसतन 1.5 लाख अनुरोध FASTag क्लोजर के आते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत मामले वाहन ट्रांसफर से जुड़े होते हैं। ऐसे में बैंकों और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) प्रणाली ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और शाखा-आधारित दोनों मॉडल में सरल बना दिया है।
कब जरूरी हो जाता है FASTag खाता बंद करना
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वाहन की सेल डीड होने पर नए मालिक को नया टैग लेना अनिवार्य है; पुराना खाता पूर्व स्वामी के नाम बंद होना चाहिए।
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वाहन स्क्रैप हो जाए तो टैग का कोई उपयोग नहीं रहता, लेकिन खाता सक्रिय रहने पर मेंटेनेंस चार्ज कटता रह सकता है।
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FASTag फट जाए या RFID चिप खराब हो जाए तो री-इश्यू की बजाय नया टैग लेना सस्ता और तेज़ विकल्प है।
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कई बार उपयोगकर्ता एक ही बैंक से दो टैग ले लेते हैं; दोनों में से एक को बंद करना पड़ता है ताकि दोहरा चार्ज न हो।
ऑनलाइन प्रक्रिया: घर बैठे 10 मिनट में अनुरोध
सबसे पहले अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या NETC पोर्टल (www.fastag.ncd.nic.in) पर लॉगिन करें। यूज़र नेम आमतौर पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर होता है। डैशबोर्ड पर ‘My FASTag’ सेक्शन में ‘Service Request’ टैब दिखेगा। यहां ‘Closure Request’ चुनने पर एक फॉर्म खुलता है जिसमें वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, टैग ID और बंद करने का कारण भरना होता है। वेबसाइट 2 MB तक का RC और आधार पीडीएफ/जेपीईजी अपलोड करने का विकल्प देती है। अनुरोध भेजते ही सिस्टम एक ओटीपी भेजता है; पुष्टि होते ही स्क्रीन पर एक SR नंबर (Service Request) फ्लैश होता है। बैंक की आंतरिक जांच दो कार्यदिवस में पूरी होती है और खाता ‘डी-ऐक्टिवेट’ स्टेटस में चला जाता है। बचा हुआ बैलेंस बैंक की नीति के मुताबिक 5-7 कार्यदिवस में लिंक्ड बचत खाते में आ जाता है। जिन ग्राहकों ने न्यूनतम मेंटेनेंस बैलेंस रखा था, वही राशि भी रिफंड में मिलती है।
ऑफलाइन विधि: शाखा में एक विज़िट, पूरा समाधान
जिन ग्राहकों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा नहीं, वे नज़दीकी बैंक शाखा में ‘FASTag Closure Form’ ले सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, HDFC बैंक और ICICI बैंक सहित सभी 34 NETC सदस्य बैंकों ने अपने कैश काउंटर पर अलग से FASTag डेस्क बनाया है। फॉर्म के साथ मूल RC, आधार और एक पासपोर्ट साइज़ फोटो जमा करना होता है। शाखा अधिकारी टैग की फिज़िकल जांच करता है; अगर टैग गुम है तो एफ़आईआर की कॉपी मांगी जा सकती है। अनुरोध स्वीकार होते ही ग्राहक को एक पावती रसीद दी जाती है जिस पर ट्रैकिंग नंबर अंकित रहता है। रिफंड राशि आमतौर पर NEFT के ज़रिए भेजी जाती है, लेकिन कुछ बैंक चेक भी देते हैं। पूरी प्रक्रिया अधिकतम 10 कार्यदिवस लेती है।
रिफंड में देरी हो तो क्या करें?
यदि 15 दिन बाद भी राशि वापस नहीं आए तो SR नंबर के साथ बैंक की टोल-फ्री हेल्पलाइन (जैसे SBI: 1800-11-0018) पर कॉल करें। इसके अलावा NHAI की ‘MyFASTag’ ऐप में ‘Grievance’ सेक्शन है जहां टिकट बनाकर भी स्थिति जानी जा सकती है। पिछले वित्त वर्ष में NHAI ने 92 प्रतिशत शिकायतें सात दिन में निपटाईं। यदि बैंक जवाब नहीं दे तो बैंकिंग लोकपाल से ऑनलाइन अपील की जा सकती है।
भविष्य में क्या बदलाव आ रहे?
सड़क परिवहन मंत्रालय अगले साल से ‘एक वाहन-एक FASTag’ नियम को और कड़ा करने जा रहा है। इसके तहत वाहन का चेसिस नंबर टैग से लिंक होगा, जिससे पुराना टैग ऑटोमैटिकली निष्क्रिय हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम दोहरे टैग की समस्या खत्म करेगा और रिफंड चक्र को भी तेज़ करेगा। जब तक नया सिस्टम नहीं आ जाता, उपयोगकर्ता को सलाह दी जाती है कि वाहन बेचते समय FASTag क्लोजर को ‘ट्रांसफर चेकलिस्ट’ में पहले स्थान पर रखें। इस छोटी सावधानी से आपकी हाईवे यात्रा भले ही खत्म हो, लेकिन आपका डिजिटल टोल अनुभव पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बना रहेगा।
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