Haryana News Hindi Today- हरियाणा के जींद जिले में साइबर अपराधियों की बढ़ती हिमाकत ने चिंता बढ़ा दी है। साइबर थाना पुलिस ने शादी के झांसे में ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसकी जद में एक न्यायाधीश भी आए। हैरानी की बात यह है कि यह गिरोह मध्य प्रदेश के इंदौर से एक संगठित फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।
न्यायाधीश की शिकायत ने खोला राज
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश जयवीर सिंह ने 16 फरवरी को साइबर थाना पहुंचकर एक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वह अपने बेटे के लिए एक उपयुक्त वधू की तलाश में थे। 10 फरवरी को एक अज्ञात नंबर से उन्हें एक फोन कॉल प्राप्त हुई। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से कई कॉल्स की गईं। ठगों ने एक मैट्रीमोनियल साइट की सदस्यता शुल्क और अन्य शुल्कों के नाम पर दो बार 35-35 हजार रुपये की रकम ठग ली। जांच में पता चला कि फोन करने वाली एक महिला ने स्वयं को संभावित दुल्हन की मां बताकर न्यायाधीश का विश्वास हासिल किया था।
इंदौर से हुई गिरफ्तारी, मिले 90 मोबाइल फोन
जज की शिकायत के बाद साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विस्तृत जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक अंतर-राज्यीय साइबर ठगी गिरोह था, जो इंदौर से सक्रिय था। पुलिस की एक टीम ने इंदौर जाकर छापेमार की और एक फर्जी कॉल सेंटर से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इंदौर निवासी रितु नामदेव, प्रमिला रोकड़े, प्रिया रोकड़े और सूरज धार्मिक के रूप में हुई है।
साइबर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया, “सभी आरोपियों को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।” चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि आरोपियों के कब्जे से 90 से अधिक मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह हर दिन अलग-अलग सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करता था ताकि पकड़ में न आ सके।
मीठी आवाज में छिपा था जाल
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह की तीनों महिला आरोपी 30 से 38 वर्ष की आयु की हैं, जो मीठी और सम्मोहक आवाज में पीड़ितों से बात करके उनका विश्वास हासिल करती थीं। यही कारण था कि लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे। रिमांड की अवधि में पुलिस इस बात की जांच करेगी कि यह गिरोह कितने और मामलों में शामिल था और देशभर में कितने लोगों को इसने ठगा है।
जींद की इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा के प्रति लोगों को सजग रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी किस तरह से भावनात्मक रूप से लोगों से जुड़ने वाले विषयों को अपना हथियार बना रहे हैं। पुलिस का यह सफल अभियान अन्य साइबर ठगों के लिए एक चेतावनी है कि अब उनकी हरकतें बेनकाब हो रही हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि अज्ञात नंबरों पर आने वाली कॉल्स पर विश्वास न करें और किसी भी तरह के ऑनलाइन लेनदेन से पहले उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित कर लें।



