Gold Rate: देश के सोने-चांदी के बाजार में गिरावट का दौर जारी है। पिछले एक सप्ताह के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी कमी दर्ज की गई है। शुक्रवार, 8 फरवरी को सोना राजधानी दिल्ली में 1,56,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी 2,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में ठहराव और डॉलर के मजबूत होने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
Gold Rate में साप्ताहिक गिरावट
पिछले सात दिनों में 24 कैरेट सोने की कीमत में लगभग 3,980 रुपये और 22 कैरेट सोने में 3,650 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। चांदी में यह गिरावट और भी तेज रही, जहां एक सप्ताह में ही कीमतें लगभग 65,000 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ गईं। 30 जनवरी को चांदी का भाव 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार था, जो अब घटकर 2.85 लाख रुपये पर पहुंच गया है।
प्रमुख शहरों में आज के Gold Rate (प्रति 10 ग्राम)
दिल्ली: 24 कैरेट – ₹156,750, 22 कैरेट – ₹143,700
मुंबई: 24 कैरेट – ₹156,600, 22 कैरेट – ₹143,550
अहमदाबाद: 24 कैरेट – ₹156,650, 22 कैरेट – ₹143,600
चेन्नई: 24 कैरेट – ₹156,600, 22 कैरेट – ₹143,550
कोलकाता: 24 कैरेट – ₹156,600, 22 कैरेट – ₹143,550
हैदराबाद: 24 कैरेट – ₹156,600, 22 कैरेट – ₹143,550
जयपुर: 24 कैरेट – ₹156,750, 22 कैरेट – ₹143,700
भोपाल: 24 कैरेट – ₹156,650, 22 कैरेट – ₹143,600
लखनऊ: 24 कैरेट – ₹156,750, 22 कैरेट – ₹143,700
चंडीगढ़: 24 कैरेट – ₹156,750, 22 कैरेट – ₹143,700
Gold में क्या होगा भविष्य
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा दिग्गज जेपी मॉर्गन ने अनुमान जताया है कि साल के अंत तक सोने की कीमत 6,300 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। इसका कारण केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की मजबूत मांग को बताया जा रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2026 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक 800 टन सोना खरीद सकते हैं, जो कीमतों को समर्थन देगा। विदेशी बाजार में, सोना 5,087.73 डॉलर प्रति औंस और चांदी 74 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही है।
Gold Rate में अस्थिरता अभी भी कायम
वर्तमान में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और कीमतें वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की गति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर हैं। हालांकि तेज गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी में रुचि बढ़ सकती है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे छोटे-छोटे कदमों में निवेश करें और बाजार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी सोने के लिए एक सकारात्मक संकेत है।



