Rajasthan Yamuna Water: राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी यमुना जल परियोजना को तीन दशक से अधिक समय बाद एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। 12 मई 1994 को हुए यमुना जल समझौते को अमल में लाने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए हथिनी कुंड बैराज से चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के एलाइनमेंट पर लिखित सहमति दे दी है। इस सहमति से शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, सीकर, झुंझुनूं) के लिए यमुना का पानी लाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
32 वर्षों के इंतजार के बाद सफलता (Rajasthan Yamuna Water)
1994 के यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान ताजेवाला हेड से 1,917 क्यूसेक यानी कुल यमुना जल का 10.4 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया था। यह पानी 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) के बराबर है। बावजूद इसके, तीन दशकों तक यह समझौता कागजों तक ही सीमित रहा। राजस्थान सरकार ने 2017, 2019 और 2021 में केंद्र और हरियाणा सरकार के पास कई प्रस्ताव भेजे, लेकिन एलाइनमेंट को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। फरवरी 2024 में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों भजनलाल शर्मा और नायब सैनी के बीच नया एमओयू हुआ, जिसके बाद यह प्रक्रिया गति पकड़ सकी।
परियोजना का स्वरूप और लाभ (Rajasthan Yamuna Water)
इस ऐतिहासिक परियोजना के तहत हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित हथिनी कुंड बैराज से चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर लंबी तीन समानांतर भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इन पाइपलाइनों के माध्यम से मानसून के दौरान ही राजस्थान को यमुना का अतिरिक्त पानी मिलेगा, जब हरियाणा पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से अपनी पूरी क्षमता (24,000 क्यूसेक) का उपयोग कर लेगा। इस पानी का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा, जिससे सूखाग्रस्त शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों को गर्मियों में भी स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।
प्रशासनिक स्वीकृति और आगे की राह (Rajasthan Yamuna Water)
पिछले महीने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में एलाइनमेंट पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, जिसे अब हरियाणा के यमुनानगर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता आर.एस. मित्तल ने लिखित रूप प्रदान कर दिया है। इसके साथ ही डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। राजस्थान सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता में रखते हुए बजट में प्रावधान किया है और अब जल्द ही डीपीआर फाइनल कर निर्माण कार्य शुरू किए जाने की संभावना है।
भविष्य की संभावनाएं (Rajasthan Yamuna Water)
राजस्थान के जल संसाधन विभाग का मानना है कि यह परियोजना न केवल मौजूदा पेयजल संकट को दूर करेगी, बल्कि यह जल जीवन मिशन और विकसित राजस्थान के संकल्प को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भविष्य में रेनुकाजी, लखवार और किशाऊ बांधों के बनने के बाद गैर-मानसून अवधि में भी राजस्थान को यमुना जल मिलने की संभावनाएं बन सकती हैं।
Rajasthan Yamuna Water पर क्या बोले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस उपलब्धि को अंतर-राज्यीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। हरियाणा से मिली लिखित सहमति न केवल तीन दशक पुराने जल अधिकारों को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह राजस्थान के लिए जल सुरक्षा और समग्र विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब सभी की निगाहें डीपीआर के जल्द तैयार होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।




