Ratlam Mandi Bhav: रतलाम मंडी में 30 अक्टूबर, 2025 को जारी हुए ताज़ा भाव आँकड़ों ने कृषि बाजार में रोचक मोड़ दर्शाया है। जहाँ एक ओर लहसुन के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्याज की कीमतों में जबर्दस्त गिरावट दर्ज की गई है। यह विरोधाभासी रुझान किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
रतलाम मंडी में लहसुन में दर्ज हुई ऐतिहासिक उछाल
मंडी के आँकड़ों के अनुसार लहसुन इस सप्ताह सबसे चर्चित उत्पाद रहा। जहाँ न्यूनतम दर 1,600 रुपये प्रति क्विंटल रही, वहीं उच्चतम दर 6,900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गई। 9.03 टन की कुल आवक के साथ लहसुन की मॉडल दर 1,600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। इस भारी अंतर से स्पष्ट है कि लहसुन की गुणवत्ता के आधार पर दामों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
रतलाम मंडी में सोयाबीन और दालों का रहा स्थिर दौर
सोयाबीन ने 282.47 टन की प्रभावशाली आवक के साथ 2,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल के दामों पर कारोबार किया। मॉडल दर 4,100 रुपये रही, जो एक संतुलित बाजार की ओर इशारा करती है। चना की आवक मात्र 0.77 टन ही रही, जिसके दाम 5,271 से 6,191 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। डॉलर चना ने 6.94 टन आवक के साथ 8,571 से 8,851 रुपये के उच्च दर्जे के भाव प्राप्त किए।
रतलाम मंडी में गेहूं और मक्के में दिखा संतुलन
गेहूं ने 50.13 टन की आवक के साथ 2,411 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के दामों पर कारोबार किया। 2,460 रुपये की मॉडल दर ने गेहूं के बाजार में स्थिरता का संकेत दिया। मक्का/भुट्टा 17.44 टन आवक के साथ 1,830 से 1,872 रुपये प्रति क्विंटल के संकीर्ण दायरे में कारोबार करता रहा, जिसकी मॉडल दर 1,850 रुपये रही।
रतलाम मंडी में प्याज के भाव में आई भारी गिरावट
प्याज की स्थिति इस सप्ताह सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही। 49.68 टन की अच्छी खासी आवक के बावजूद प्याज का न्यूनतम दर मात्र 327 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि उच्चतम दर 2,200 रुपये और मॉडल दर 391 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। यह आँकड़े प्याज की बाजार में मौजूदा दौर में आई भारी गिरावट को रेखांकित करते हैं।
रतलाम मंडी के इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि कृषि बाजार इस समय मिश्रित संकेत दे रहा है। जहाँ लहसुन जैसी फसलों के दाम आसमान पर हैं, वहीं प्याज जैसी ज़रूरी वस्तु की कीमतें सागर की तलहटी में पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों की आवक, माँग और गुणवत्ता के बीच का यह असंतुलन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। किसानों और व्यापारियों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे बाजार के इन उतार-चढ़ावों के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम करें।



