MSP Rate News- देशभर की कृषि मंडियों में इन दिनों खरीफ सीजन की दालों और तिलहनों के दाम चिंताजनक रूप से नीचे चल रहे हैं। नई फसल की आवक के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मंडियों में नहीं मिल पा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा बाजार भाव सरकार द्वारा 2025-26 के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी नीचे तक खरीद जारी हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
MSP और बाजार भाव में बड़ा अंतर
मंडी भाव के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दालों में सबसे ज्यादा अंतर मूंग में देखने को मिल रहा है। जहां मूंग का MSP 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, वहीं इसका औसत बाजार भाव महज 7,220 रुपये प्रति क्विंटल तक मंडी भाव किसानो को मिल रहे है। यानी MSP से 1,548 रुपये प्रति क्विंटल कम। इसी तरह उड़द का भाव 6,368 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि MSP 7,800 रुपये तय है। अरहर (तूर) की स्थिति और भी खराब है, जो 6,222 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, जबकि इसका MSP 8,000 रुपये केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित है।
तिलहन की फसलों की हालत भी कुछ बेहतर नहीं है। मूंगफली का औसत भाव 5,682 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि MSP 7,263 रुपये तय किया गया है। सोयाबीन का भाव 4,252 रुपये प्रति क्विंटल पर है, जबकि इसका MSP 5,328 रुपये है।
इस साल कम बुवाई के बावजूद दामों में गिरावट
किसानों की इस स्थिति की विडंबना यह है कि इस साल दालों और तिलहनों की बुवाई पहले ही कम इलाकें में हुई है। कृषि विशेषज्ञ इस स्थिति को चिंताजनक मान रहे हैं। विशेषज्ञ विजय सरदाना का कहना है कि “पूरे साल दाम कम रहे हैं और अभी भी वही हाल है। एमएसपी अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव से कही मेल नहीं खाता, ऊपर से सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए आयात पर शून्य या बेहद कम शुल्क लगाती है।”
कई राज्यों ने उठाई मदद की मांग
हाल ही में हुई रबी सम्मेलन में कर्नाटक के कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार से खरीफ की दालों और तिलहनों की तुरंत खरीद शुरू करने की मांग की है। उनका तर्क है कि नई फसल की आवक किसानों से हो रही है और मंडी भाव MSP से काफी नीचे हैं, ऐसे में किसानों को राहत देना जरूरी है। तेलंगाना के कृषि मंत्री ने भी दालों और तिलहनों की खरीद पर किसी तरह की पाबंदी न लगाने की अपील भी केंद्र सरकार से की है।
अनियमित मानसून और भारी बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
इस साल कई राज्यों में अनियमित मानसून और भारी बारिश ने फसलों को प्रभावित किया है। राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कई इलाकों में बारिश का असर फसलों पर पड़ा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अक्टूबर के मध्य तक भी दामों में सुधार नहीं होता है, तो सरकार को कीमतों को संभालने के लिए हस्तक्षेप भी करना पड़ सकता है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में तिलहन और दलहन की घटती बुवाई पर भी चिंता जताई थी, हालांकि उन्होंने कहा था कि किसान अपनी सुविधा के अनुसार फसल का चुनाव करते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में किसानों के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे अपनी फसल का उचित दाम कब और कैसे मंडियों में प्राप्त कर पाएंगे।



