Delhi High Court Lawyer, मीडिया न्यूज़: दिल्ली उच्च न्यायालय की एक वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और ऑनलाइन कार्यवाही की सुरक्षा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में एक वकील को एक महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते साफ़ देखा गया है। यह घटना मंगलवार को तब की बताई जा रही है, जब अदालत का सत्र शुरू होने से पूर्व लोग न्यायाधीश के आने का इंतजार कर रहे थे। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से ही कानूनी हल्कों और सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।
घटना का विवरण: क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में?
वायरल हुए वीडियो फुटेज में एक वकील को औपचारिक कोट-पैंट पहने अपने कमरे में बैठे देखा जा सकता है। कैमरे में उनका पूरा चेहरा साफ नहीं दिख रहा है। इसी दौरान एक साड़ीधारी महिला उनके सामने खड़ी नजर आती हैं। आगे की घटनाक्रम चौंकाने वाला है – वकील ने महिला का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचने का प्रयास किया। महिला द्वारा थोड़ा विरोध करने के बावजूद, वकील ने अचानक उसके गाल पर किस कर दिया। इसके तुरंत बाद महिला वहां से हट गई। फिलहाल, दोनों व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही यह स्पष्ट है कि यह वीडियो किस उद्देश्य से रिकॉर्ड किया गया था।
सोशल मीडिया पर उबाल, जनता में गुस्सा
Welcome to Digital India Justice 😂
Court is online… but judge forgot it’s LIVE! ☠️
When tech meets tradition
— and the camera off button loses the case! 🤣 pic.twitter.com/1GbfOFQ6w7
— ShoneeKapoor (@ShoneeKapoor) October 15, 2025
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पहुंचा, नेटिजन्स के बीच तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। अधिकतर यूजर्स ने इस घटना को न्यायपालिका के लिए शर्मनाक करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “ऐसी हरकतें देखकर शर्म आती है, खासकर तब जब यह एक वकील जैसे पेशेवर व्यक्ति द्वारा किया गया हो।” एक अन्य यूजर ने रिमोट वर्किंग कल्चर पर टिप्पणी करते हुए कहा, “ये तो पकड़ा गया, वरना ऐसे बहुत से लोग हैं जो वर्क फ्रॉम होम के नाम पर अनुचित हरकतें करते हैं।”
कई यूजर्स ने इस घटना को न्यायपालिका की ऑनलाइन कार्यप्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा बताया। एक यूजर ने तीखा तंज कसते हुए लिखा, “जस्टिस भले अंधा हो, लेकिन अब तो म्यूट और कैमरे पर पकड़ा गया।”
कानूनी पहलू और संभावित कार्रवाई
हालाँकि अभी तक इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया का यह वीडियों यदि यह वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो संबंधित वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालय के समय में, चाहे वह भौतिक हो या आभासी, ऐसा व्यवहार पेशेवर misconduct (दुराचरण) की श्रेणी में आता है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत एक वकील से उच्च आचरण की अपेक्षा की जाती है, चाहे वह कोर्ट परिसर में हो या वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर। ऐसे में, यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो वकील का लाइसेंस रद्द होना तक की नौबत भी आ सकती है।
यह घटना न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के दौर में उभरने वाली नई चुनौतियों को उजागर करती है। वर्चुअल कोर्टरूम की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अब एक गंभीर मुद्दा बन गया है। जहाँ एक ओर इस वीडियो की सत्यता की जाँच आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यह घटना सभी पेशेवरों, विशेष रूप से कानूनी फील्ड से जुड़े लोगों के लिए एक चेतावनी है कि ऑनलाइन माध्यम भी उतने ही गंभीर और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार की मांग करते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह इस मामले की त्वरित जांच करके उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।



