Haryana News भिवानी- गाँव की पंचायत में एक पिता की आँखों में छुपा दर्द और उसकी आवाज में घुली गुहार… यह नज़ारा था मंगलवार दोपहर ढाणी लक्ष्मण गाँव की उस सामूहिक पंचायत का, जहाँ एक बेटी को खो चुके परिवार को मिल रहा है पूरे समुदाय का समर्थन। मनीषा नामक युवती की रहस्यमय मौत के मामले में न्याय की माँग को लेकर गाँव वालों ने एकजुटता का ऐसा परचम लहराया, जिसने स्थानीय प्रशासन तक को सोचने पर फिर मजबूर कर दिया है।
पंचायत में दिखा एक पिता का दर्द, एक समुदाय का साथ
मंगलवार की इस पंचायत में सिर्फ ढाणी लक्ष्मण के ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गाँवों के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। इस जनसभा के केंद्र में थे मनीषा के पिता संजय। भावनाओं से सिहरते हुए, उन्होंने हाथ जोड़कर उपस्थित जनसमूह से अपनी बेटी को न्याय दिलाने की गुहार लगाई। उनके शब्द न सिर्फ उनके अपने दर्द, बल्कि हर उस माता-पिता की पीड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। संजय ने बताया कि मामला सीबीआई के पास जाने के बावजूद, उन्हें जांच की प्रगति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जांच की रफ्तार उनके लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
गाँव की पंचायत का फैसला: अब धरना और भूख हड़ताल का रास्ता
पंचायत में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक अहम फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि 30 नवंबर को गाँव के मुख्य चौक पर एक सांकेतिक धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीण भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे। यह कदम उनकी बढ़ती बेचैनी और न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी के प्रति एक स्पष्ट असहमति का संकेत है। पंचायत में यह मांग बुलंद की गई कि सीबीआई मनीषा मौत के मामले की सच्चाई को जल्द से जल्द सामने लाए और परिवार को अब तक हुई जांच की पूरी जानकारी से अवगत कराए।
पंचायत से किसान नेताओं ने दी सरकार को चेतावनी
इस पंचायत में मौजूद किसान नेता सुरेश कौथ ने हरियाणा सरकार पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में गंभीरता दिखाने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को सीबीआई को एक औपचारिक पत्र लिखकर जांच में तेजी लाने के लिए निर्देश देना चाहिए। श्री कौथ ने एक स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जांच में शीघ्र ही ठोस प्रगति नहीं देखी गई, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले लेगा। उनके इस बयान ने स्थानीय प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
ढाणी लक्ष्मण गाँव की यह पंचायत सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक न्याय के प्रति जनता के संकल्प का प्रतीक बन गई है। एक पिता का दर्द अब पूरे समुदाय की आवाज बन चुका है। 30 नवंबर का धरना इस संघर्ष की अगली कड़ी होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस जनआक्रोश के बाद भी जांच एजेंसियां और सरकार मुखर होकर जवाब देगी, या फिर यह इंतजार और लंबा खिंच जाएगा। मनीषा के परिवार को मिला समर्थन यह साबित करता है कि न्याय की माँग करने वाली आवाजें अब चुप नहीं रह सकतीं।



