Punjab Haryana High Court : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab Haryana High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान, बंकर में सोते समय हुई सैनिक की मृत्यु को भी ‘ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु’ (Death Attributable to Military Service) ही माना जाएगा। न्यायालय ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी), चंडीगढ़ के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें दिवंगत सैन्य अधिकारी की पत्नी को उच्च श्रेणी की ‘लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन’ देने का निर्देश दिया गया था।
Punjab Haryana High Court से मिली राहत
मामला मेजर सुशील कुमार सैनी (निवासी रेवाड़ी) का है, जिनकी पत्नी अनुराधा सैनी ने एएफटी में पेंशन के लिए याचिका दायर की थी। मेजर सैनी भारत-पाकिस्तान सीमा पर ‘ऑपरेशन रक्षक’ के तहत एक अधिसूचित ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात थे। घटनाक्रम के अनुसार, जिस रात उनकी मृत्यु हुई, उस दिन सीमा पर घुसपैठ की कोशिश की सूचना मिली थी। इसके बाद मेजर सैनी ने आवश्यक निर्देश दिए और पूरी स्थिति की निगरानी की। ऑपरेशनल तनाव और पूर्ववर्ती उच्च रक्तचाप के कारण उन्हें रात में बंकर में सोते समय दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
सरकार की दलील और न्यायालय का तर्क (Punjab Haryana High Court)
केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि चूंकि अधिकारी की मृत्यु नींद के दौरान हुई थी, इसलिए इसे ऑपरेशनल गतिविधि के दौरान हुई मौत नहीं माना जा सकता। सरकार ने आश्रित को ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ (जो लिबरलाइज्ड पेंशन से कम होती है) देने की बात कही।
हालांकि, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी और न्यायमूर्ति विकास सूरी की खंडपीठ ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी सक्रिय ऑपरेशनल ड्यूटी पर थे और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट ने भी उनकी मृत्यु को सैन्य सेवा से संबंधित बताया है। न्यायालय ने सरकारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को श्रेणी ई(आई) के अंतर्गत रखा गया है, जिसमें सरकार द्वारा अधिसूचित सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मौतें शामिल हैं।
Punjab Haryana High Court प्रकृति और उससे जुड़े जोखिमों को मान्यता
यह निर्णय सीमा पर तैनात सैनिकों की सेवा की प्रकृति और उससे जुड़े जोखिमों को मान्यता देता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब एक सैन्यकर्मी ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात है, तो उसकी मृत्यु के समय की गतिविधि (चाहे वह सो रहा हो या जाग रहा हो) से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह उस समय ड्यूटी पर था और उसकी मृत्यु सेवा से जुड़ी परिस्थितियों में हुई। यह फैसला देश के सैन्यकर्मियों और उनके आश्रितों के अधिकारों को मजबूती प्रदान करता है तथा सैन्य सेवा की कठिन परिस्थितियों में न्यायिक व्याख्या का एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है।



