शुक्रवार तड़के करीब 4:15 बजे पानीपत जिले की सैनी कॉलोनी में स्थित एक बड़ी कारपेट फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। उस समय 65 मजदूर मशीनों पर काम कर रहे थे। फैक्ट्री में रखे रासायनिक गोंद, सिंथेटिक धागे और पॉलिप्रोपिलीन चिप्स ने आग को भयंकर बना दिया। देखते ही देखते 8,000 वर्ग फुट का शेड लपटों की चादर में लपेट लिया गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुँचीं और आस-पास के तीन गांवों की टैंकर सप्लाई भी मंगाई गई। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पूरी इकाई जलकर खाक हो गई है।
- तड़के का दृश्य: धुआँ देख पड़ोसी दौड़े
- पानीपत में 65 मजदूर, सब सुरक्षित निकाले गए
- आठ दमकल गाड़ियां, तीन गांवों की टैंकर सप्लाई
- कारणों की जांच में जुटी पानीपत पुलिस
- पानीपत कारपेट फैक्ट्री के आस-पास का एरिया खाली, बिजली कटी
- पर्यावरणीय चिंता भी
- मालिक का बयान और मुआवज़े की बात
- पानीपत कारपेट फैक्ट्री पर आगे की कार्यवाही
तड़के का दृश्य: धुआँ देख पड़ोसी दौड़े
फैक्ट्री के सामने रहने वाले दिनेश कुमार बताते हैं, “मैं सुबह 4 बजे टहलने निकला था, अचानक अंदर से नीला-लाल चिंगारी उठती दिखी। मैंने चिल्लाकर सुरक्षा गार्ड को जगाया और फायर ब्रिगेड को कॉल किया। 10 मिनट में ही आग इतनी भयंकर हो गई कि छत की टिन-शीट उड़ने लगीं।”
पानीपत में 65 मजदूर, सब सुरक्षित निकाले गए
फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट में काम कर रहे बिहार निवासी मजदूर राकेश कुमार ने बताया, “हम लूम पर कारपेट बुन रहे थे, तभी ब्लीचिंग सेक्शन से धुआँ उठा। मैनेजर ने तुरंत हूटर बजाया और सभी को इमरजेंसी गेट की तरफ भेजा। हमने पानी की पाइप लाइन तोड़कर आग बुझाने की कोशिश की, पर केमिकल ने आग को तेजी से फैलाया।” पुलिस के अनुसार सभी 65 मजदूरों को बिना चोट के बाहर निकाल लिया गया; दो को हल्का धुआँ चढ़ा, जिन्हें प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई।
आठ दमकल गाड़ियां, तीन गांवों की टैंकर सप्लाई
पानीपत फायर ऑफिसर प्रदीप कुमार ने बताया, “आग इतनी तेज थी कि पहली दमकल गाड़ी के पहुँचते ही शेड की छत ढह गई। हमने तुरंत ‘ब्रिगेड कॉल’ जारी किया और करनाल, सोनीपत व समालखा से भी गाड़ियां मंगाईं। करीब 3 लाख लीटर पानी छिड़का गया। 6 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।” फैक्ट्री के पास नहर नहीं होने से टैंकरों को 15 किमी दूर से लाया गया।
कारणों की जांच में जुटी पानीपत पुलिस
एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम ने मौके से केमिकल सैंपल लिए हैं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट-सर्किट का संदेह जताया गया है, लेकिन फायर ऑफिसर का कहना है, “ब्लीचिंग मशीन के पास इलेक्ट्रिक पैनल में स्पार्किंग दिखी है, पर केमिकल वाष्प ने आग को भड़काया। अंतिम रिपोर्ट आने में 15 दिन लगेंगे।”
पानीपत कारपेट फैक्ट्री के आस-पास का एरिया खाली, बिजली कटी
सुरक्षा के लिहाज से 200 मीटर की परिधि में रहने वाले लोगों को बाहर निकाला गया। बिजली विभाग ने फीडर बंद कर दिया ताकि पानी और धातु के संपर्क से कोई हादसा न हो। पुलिस ने धारा 144 लागू करते हुए भीड़ को दूर रखा।
पर्यावरणीय चिंता भी
कारपेट इंडस्ट्री में फिनिशिंग के लिए फॉर्मेल्डिहाइड और लेटेक्स का इस्तेमाल होता है। इनके जलने से नीला-धुआँ उठा, जिससे आस-पास के लोगों में खांसी और आँखों में जलन की शिकायत हुई। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एयर क्वालिटी चेक की; PM2.5 का स्तर 300 μg/m³ पार कर गया, जो सामान्य से 6 गुना ज़्यादा है।
मालिक का बयान और मुआवज़े की बात
फैक्ट्री मालिक अजय जैन ने कहा, “मेरी 35 साल की मेहनत एक ही रात में जल गई, लेकिन मुझे खुशी है कि कोई जान नहीं गई। हर मजदूर को 15 दिन का अग्रिम वेतन और राशन किट दिया जाएगा। यदि जांच में मेरी लापरवाही सिद्ध हुई तो मैं खुद कोर्ट में पेश होऊंगा।”
पानीपत कारपेट फैक्ट्री पर आगे की कार्यवाही
जिला प्रशासन ने फैक्ट्री की लाइसेंस जांच शुरू की है; यदि फायर-नो-सबमिशन या इलेक्ट्रिक ऑडिट में लापरवाही मिली तो मुकदमा दर्ज होगा। श्रम विभाग ने भी नोटिस भेजा है कि सभी मजदूरों का बीमा और पीएफ अपडेट किया जाए।
पानीपत की कारपेट बेल्ट में आग की यह घटना फिर याद दिलाती है कि औद्योगिक यूनिटों में फायर-ऑडिट, इमरजेंसी ड्रिल और केमिकल स्टोरेज प्रोटोकॉल को गंभीरता से लेना होगा। रात का अंधेरा और ठंडा मौसम बड़ी आपदा टाल गया, पर अगली बार भाग्य इतना मेहरबान नहीं रहेगा। प्रशासन की तत्परता और मजदूरों की सजगता ने जान बचाई; अब बारी है सुरक्षा-मानकों को पुख्ता करने की ताकि रात का सन्नाटा कभी चीखों में न बदले।



