चंडीगढ़, 23 दिसंबर 2025 हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को जबर्दस्त हंगामे के बीच शुरू हुआ। कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने BPL मुफ्त राशन योजना को “स्कैंडल का नया चेहरा” करार देते हुए दावा किया कि चुनाव से पहले प्रदेश में 51 लाख से अधिक BPL/अंत्योदय कार्ड थे, जबकि आज सरकार 37 लाख ही बता रही है। 11 लाख से ज़्यादा कार्ड “गायब” हो गए—इनका राशन कहां गया? सवाल उठते ही खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने ताज़ा आंकड़े पेश किए; मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सीधे सदन में मोर्चा संभाला और विपक्ष को करारा जवाब दिया।
51 से 37 लाख—11 लाख BPL कार्ड गायब?
कांग्रेस के बीबी बत्रा ने आरोप लगाया:
– चुनाव-2024 से ठीक पहले 51.3 लाख कार्ड धारक थे
– मतदान के बाद यह संख्या घटकर 40 लाख रह गई
– आज सरकार कह रही है—37.67 लाख BPL + 3.01 लाख अंत्योदय = 40.68 लाख
“इसका मतलब साफ है—चुनाव जीतने के लिए फर्जी कार्ड बनाए गए, बाद में डिलीट कर दिए गए। यह मुफ्त राशन घोटाला है,” बत्रा ने कहा। उन्होंने मांग की कि पूरी सूची विधानसभा में टेबल की जाए और जिन कार्डों को रद्द किया गया है, उसकी जांच CAG या न्यायिक आयोग से कराई जाए।
मंत्री ने रखे ताज़ा आंकड़े
खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया:
– वर्तमान में वैध BPL कार्ड: 37,67,264
– अंत्योदय अन्न योजना कार्ड: 3,01,700
– कुल लाभार्थी परिवार: 40,68,964
– प्रति माह मुफ्त राशन: 3.14 लाख टन (चावल + गेहूं)
उन्होंने कहा, “2020 में सर्वे हुआ था, तब 42.9 लाख कार्ड थे। चुनाव के समय कुछ अस्थाई कार्ड बनाए गए थे, लेकिन वे मतदान के बाद स्वतः निष्क्रिय हो गए। कोई घोटाला नहीं हुआ है।” मंत्री ने यह भी बताया कि 2024-25 में ₹7,200 करोड़ का मुफ्त अन्न बांटा गया और 99.8% डिजिटल OTP आधारित उठान हुआ।
CM ने दिया करारा जवाब
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, “कांग्रेस को सरकार खारिज कर चुकी है, इसलिए वह झूठे मुद्दे उठा रही है। चुनाव से पहले हमने सिर्फ़ अस्थाई कार्ड दिए थे ताकि कोई भी भूखा न रहे। मतदान के बाद उसे निष्क्रिय कर दिया गया। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, न कि घोटाला।” उन्होंने चुनौती दी कि यदि किसी कार्ड धारक का नाम गायब हुआ है तो वह सीधे CM विंडो में शिकायत करे—72 घंटे में सुधार होगा।
तकनीकी जवाब—OTP, आधार, ई-POU
मंत्री नागर ने बताया कि हर राशन उठान पर OTP और आधार आधारित ई-POU (electronic proof of uptake) बनता है। इससे डुप्लीकेट या फर्जी उठान संभव नहीं। यदि कोई कार्ड निष्क्रिय किया गया है तो उसका कारण—डुप्लीकेट आधार, मृतक व्यक्ति, या दूसरे राज्य में ट्रांसफर—दर्ज है। “हमने सारा डेटा विधानसभा में टेबल कर दिया है,” मंत्री ने कहा।
उपभोक्ता के लिए संदेश
– यदि आपका कार्ड रद्द हुआ है → cmwindow.haryana.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत
– नया आवेदन → जन सेवा केंद्र या ई-दिशा पोर्टल
– हेल्पलाइन : 1078 (24×7)
आगे की राह
सरकार ने ऐलान किया है कि 1 जनवरी 2026 से हर राशन कार्ड का कैलेंडर ई-POU आधारित होगा। यदि तीन महीने तक उठान नहीं होता तो कार्ड स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इससे फर्जी कार्ड समाप्त होंगे और वास्तविक लाभार्थी को राहत मिलेगी।
विधानसभा में उठा 11 लाख कार्ड का मुद्दा सिर्फ़ आंकड़ों की लड़ाई नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा है। यदि सरकार का दावा सही है—कि फर्जी कार्ड हटाए गए—तो यह उपभोक्ता हितैषी कदम है; लेकिन यदि किसी वास्तविक लाभार्थी का नाम कटा है तो CM विंडो उसके लिए भी खुला है। सबसे बड़ा संदेश: राशन कार्ड अब ‘जीवनभर वैध’ नहीं रहेगा; हर तीन महीने में उठान और हर पाँच साल में सत्यापन अनिवार्य होगा। जनता की जिम्मेदारी—अपना डेटा अपडेट रखें, शिकायत ऑनलाइन करें और सदन में उठाए गए सवालों का जवाब RTI से मांगें।



