EPFO 3.0 Update, नई दिल्ली: देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) सदस्यों के लिए डिजिटल सेवाओं का एक नया और विस्तृत दौर शुरू होने जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपनी तकनीकी प्रणाली और सेवा वितरण में बड़े बदलाव की तैयारी में है, जिसे ‘EPFO 3.0’ का नाम दिया गया है। इस पहल का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सदस्यों को तीव्र, पारदर्शी और सुगम सेवाएं प्रदान करना है।
केंद्रीकृत बैंकिंग प्रणाली जैसा होगा EPFO 3.0 का नया ढांचा
सूत्रों के अनुसार, यह परिवर्तन केवल एक नया वेब पोर्टल लॉन्च करने तक सीमित नहीं होगा। EPFO अपने सम्पूर्ण बैकएंड सॉफ्टवेयर को नए सिरे से विकसित करेगा और एक केंद्रीकृत प्रणाली की तरफ बढ़ेगा, जिस प्रकार आधुनिक बैंकिंग में ‘कोर बैंकिंग सॉल्यूशन’ काम करता है। इस नई व्यवस्था के बाद किसी सदस्य को अपना कार्य कराने के लिए किसी विशिष्ट कार्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। देश के किसी भी EPFO केंद्र से वह अपना कार्य सम्पन्न करा सकेगा, जिससे फाइलों के अटकने और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या काफी हद तक समाप्त होने की उम्मीद है।
EPFO 3.0 में बहुभाषी सहायता और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयारी
इस योजना की एक प्रमुख विशेषता सदस्यों को उनकी मातृभाषा में सूचना एवं सेवाएं प्रदान करना होगी। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा अनुवाद उपकरणों, जैसे कि मंत्रालय द्वारा विकसित ‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म, का उपयोग किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। नए श्रम संहिता के लागू होने के साथ ही EPFO का दायरा संगठित क्षेत्र से आगे बढ़कर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक पहुंच सकता है। ऐसे में, वर्तमान में लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्यों और 28 लाख करोड़ रुपये के कोष का प्रबंधन करने वाले इस संगठन के लिए एक मजबूत, स्केलेबल तकनीकी ढांचा अत्यंत आवश्यक हो गया है।
सामाजिक सुरक्षा का एक डिजिटल स्तंभ बनेगा EPFO 3.0
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अंतिम लक्ष्य एक ऐसी विश्वसनीय डिजिटल प्रणाली का निर्माण करना है, जो देश के प्रत्येक कामगार तक, उसकी अपनी भाषा में, किसी भी स्थान से पहुंच सके। यदि यह परिवर्तन योजना के अनुसार सफल रहता है, तो भविष्य निधि से संबंधित सभी प्रक्रियाएं अधिक सुचारू, पारदर्शी और समय की बचत करने वाली बन सकेंगी, जिससे EPFO देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का एक और मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगा।



