Bharat Taxi Explained: वर्षों से भारतीय टैक्सी बाजार पर कुछ निजी ऐप-आधारित कंपनियों का दबदबा रहा है। इस एकाधिकार ने न सिर्फ यात्रियों के विकल्प सीमित किए, बल्कि ड्राइवरों की आय पर भी गहरा असर डाला। लेकिन अब यह परिदृश्य बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘भारत टैक्सी’ नामक देश की पहली सहकारी टैक्सी सेवा का शुभारंभ किया है। यह सेवा सीधे तौर पर ओला और उबर जैसी निजी कंपनियों के बाजार में एक नया विकल्प और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लाने का संकल्प लेकर आई है।
- Bharat Taxi से एक सहकारी सपने की शुरुआत
- Bharat Taxi से मिलेगा निजी कंपनियों की मनमानी का जवाब
- Bharat Taxi एक ‘नो कमीशन’ मॉडल: एक क्रांतिकारी बदलाव
- दिल्ली से शुरू होगा सफर, फिर देश के कोने-कोने तक
- Bharat Taxi में 2030 तक एक लाख ‘सारथियों’ का लक्ष्य
- Bharat Taxi में सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भूमिका
- पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल
Bharat Taxi से एक सहकारी सपने की शुरुआत
मोदी सरकार की Bharat Taxi देश के महत्वाकांक्षी परियोजना केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के सहयोग का परिणाम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग और सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल का मूल उद्देश्य ड्राइवरों को उनकी कमाई का पूरा हकदार बनाना और यात्रियों को एक विश्वसनीय, पारदर्शी एवं किफायती यात्रा अनुभव प्रदान करना है।
Bharat Taxi से मिलेगा निजी कंपनियों की मनमानी का जवाब
पिछले कुछ वर्षों में ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर यात्रियों और ड्राइवरों, दोनों की ओर से असंतोष की स्थिति बनी रही। यात्रियों को कभी सुरक्षा, तो कभी बढ़े हुए किराए या गाड़ियों की सफाई को लेकर शिकायतें रहीं। वहीं ड्राइवरों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण थी, उन्हें अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा, जो कभी-कभी 25 प्रतिशत तक होता था, कमीशन के रूप में कंपनियों को देना पड़ता था। भारत टैक्सी को इन्हीं चुनौतियों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
Bharat Taxi एक ‘नो कमीशन’ मॉडल: एक क्रांतिकारी बदलाव
भारत टैक्सी की सबसे बड़ी और आकर्षक विशेषता है इसका ‘नो कमीशन’ मॉडल। इसके तहत ड्राइवरों से किसी भी प्रकार का कमीशन नहीं लिया जाएगा। उन्हें केवल एक सदस्यता शुल्क का भुगतान करना होगा, जो दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आधार पर तय हो सकता है। इस व्यवस्था से यात्रा का पूरा किराया सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने और उनके जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है। एक और सकारात्मक पहलू यह है कि इस सेवा से जुड़े वाहन चालकों को ‘ड्राइवर’ नहीं, बल्कि सम्मानजनक उपाधि ‘सारथी’ के नाम से संबोधित किया जाएगा।
दिल्ली से शुरू होगा सफर, फिर देश के कोने-कोने तक
भारत टैक्सी सेवा का पायलट प्रोजेक्ट आगामी नवंबर महीने में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रारंभ किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में लगभग 650 वाहन और उनके मालिक-ड्राइवर इस सहकारी मॉडल का हिस्सा बनेंगे। इस पायलट के सफल रहने पर दिसंबर महीने से देश के अन्य प्रमुख शहरों में इसका विस्तार किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 5,000 ड्राइवरों (सारथियों) को जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें महिला ड्राइवर भी शामिल होंगी।
Bharat Taxi में 2030 तक एक लाख ‘सारथियों’ का लक्ष्य
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य मार्च 2026 तक भारत टैक्सी सेवा को देश के सभी प्रमुख मेट्रो शहरों में स्थापित करने का है। वहीं 2030 तक इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक लाख से अधिक ड्राइवरों को जोड़ने और सेवा का दायरा जिला मुख्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने की योजना है। यह केवल एक टैक्सी सेवा नहीं, बल्कि सहकारिता आंदोलन को एक नई गति और दिशा देने वाला प्रयास माना जा रहा है।
Bharat Taxi में सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भूमिका
Bharat Taxi किसी निजी लाभ-केंद्रित कंपनी की तरह संचालित नहीं होगी, बल्कि यह एक सहकारी उद्यम के रूप में कार्य करेगी। इसका संचालन ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ द्वारा किया जाएगा, जिसे जून 2025 में 300 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ स्थापित किया गया था। इस परियोजना की निगरानी के लिए गठित गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता कर रहे हैं, जबकि एनसीडीसी के उप प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता उपाध्यक्ष के पद पर हैं।
पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल
भारत टैक्सी को केवल एक बुकिंग ऐप नहीं, बल्कि ड्राइवरों और यात्रियों के बीच विश्वास की नई संकल्पना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जहां प्रौद्योगिकी, सहकारिता और पारदर्शिता का सम्मिलित बल देश के परिवहन क्षेत्र में एक नई इबारत लिखे। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भारत टैक्सी भविष्य में न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि विश्व स्तर पर “सहकारी गतिशीलता” का एक आदर्श उदाहरण बन सकती है।
गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च में लोकसभा में की गई घोषणा को अब मूर्त रूप लेते देखा जा सकता है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि Bharat Taxi का सहकारी मॉडल का लाभ किसी धन्नासेठ तक नहीं, बल्कि सीधे टैक्सी चालक तक पहुंचेगा।



